@.ज्ञापन… ★. मांगों को लेकर वन पंचायत सरपंचों ने देहरादून खोला मोर्चा, वन पंचायतों को अधिकार न देने पर आक्रोश ★. मुख्यमंत्री आवास पर निजी सचिव को सौंपा सरपंचों ने ज्ञापन । ———————————————- रिपोर्ट (चन्दन सिंह बिष्ट) “स्टार खबर” देहरादून नैनीताल

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★. मांगों को लेकर वन पंचायत सरपंचों ने देहरादून खोला मोर्चा, वन पंचायतों को अधिकार न देने पर आक्रोश

★. मुख्यमंत्री आवास पर निजी सचिव को सौंपा सरपंचों ने ज्ञापन ।

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रिपोर्ट (चन्दन सिंह बिष्ट) “स्टार खबर” देहरादून नैनीताल
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कहा है कि वन पंचायतों की लीसा रॉयल्टी का पैसा वर्षों तक वन पंचायतों के खातों में नहीं डाला जा रहा है। जिससे बजट की कमी से वन पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वन पंचायतों को उनकी रॉयल्टी का पैसा दिए जाने की मांग एवं वन पंचायत के सरपंचों को मानदेय सहित कई अन्य मांगों पर सीएम आवास पर निजी सचिव को सौंपा ज्ञापन ।

देहरादून:
वन पंचायत सरपंचों ने वन पंचायतों को सशक्त करने की मांग तेज कर दी है। शुक्रवार को उत्तराखंड के सभी जिलों के विभिन्न स्थानों से देहरादून पहुंचे सरपंचों ने अपनी मांगों को लेकर सीएम आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की निजी सचिव के माध्यम से मुख्य ज्ञापन भेजा। सरपंचों का कहना था कि उत्तराखंड में 12089 वन पंचायतें 544964.17 हेक्टेयर वन क्षेत्र का प्रबंधन कर रही हैं। लेकिन शासन प्रशासन की उपेक्षा के चलते वन पंचायतें संकट के दौर से गुजर रही हैं। सीएम को भेज ज्ञापन में सरपंचों ने वन पंचायतों के चुनाव पूरे प्रदेश में एक साथ गुप्त मतदान द्वारा कराए जाने, पंचायती वनों का न्यूनतम क्षेत्रफल गांव की आबादी के अनुसार निर्धारित करने, कम क्षेत्रफल वाली वन पंचायतों में आरक्षित वन क्षेत्र का हिस्सा मिलाने, वन पंचायतों को नियमित बजट उपलब्ध कराने, जान जोखिम में डालकर वनों की सुरक्षा कर रहे सरपंचों को सम्मानजनक मानदेय दिए जाने की मांग की गई है। कहा है कि वन पंचायतों की लीसा रॉयल्टी का पैसा वर्षों तक वन पंचायतों के खातों में नहीं डाला जा रहा है। जिससे बजट की कमी से वन पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वन पंचायतों को उनकी रॉयल्टी का पैसा दिए जाने की मांग की गई है। कहा है कि वन पंचायतों के गठन के समय वर्ष 1931 में वन पंचायतों के वन विभाग के हस्तक्षेप से मुक्त रखा गया था लेकिन आज वन पंचायतें पूरी तरह वन विभाग के नियंत्रण में दे दी गई हैं।

वन विभाग के हस्तक्षेप से मुक्त कर वन पंचायतों को वनाधिकार कानून 2006 के दायरे में लाने, वन पंचायत नियमावली 2001 को पूरी तरह लागू करने और वन पंचायत सरपंचों को राज्य परामर्शदात्री समिति का अध्यक्ष बनाए जाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है। ज्ञापन में कहा है कि वन पंचायतों एवं वन पंचायत सरपंचों की अधिकार नहीं दिए गए तो वन पंचायत सरपंच संगठन अपने सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन शुरू कर देगा। हिंसक वन्य जीव से जानवर की छति को रोकने हेतु ठोस कार्रवाई की जाए ।

एवं जंगली जानवरों द्वारा जनहानि के मामले में अनुग्रह राशि को कम से कम 10 लाख किया जाए ।ज्ञापन देते समय सरपंच चन्दन सिंह बिष्ट , मंजू जोशी ,रंजना देवी, अनिता देवी,भुपाल भंडारी ,नंदन सिंह ,भगवती प्रसाद सती ,रोहन नेगी , विनोद पांडे कमल सुनाल एवं सभी जिलों के सरपंच उपस्थित शामिल रहे।