@आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नौकरियों को किसी तरह का खतरा नहीं….. ★दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर हुआ गंभीर मंथन…. ★देशभर से शिक्षकों और शोधार्थियों ने की सहभागिता….. ★रिपोर्ट – ( हर्षवर्धन पांडे ) “स्टार खबर ” नैनीताल

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@आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नौकरियों को किसी तरह का खतरा नहीं…..

★दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर हुआ गंभीर मंथन….

★देशभर से शिक्षकों और शोधार्थियों ने की सहभागिता…..

★रिपोर्ट – ( हर्षवर्धन पांडे ) “स्टार खबर ” नैनीताल

हल्द्वानी- पेशेवरों और विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डरने की जरूरत नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से किसी को नौकरी का खतरा नहीं रहेगा बल्कि नए रोजगार केनए रास्ते खुलेंगे। इस तकनीक की सहायता से ऐसा सिस्टम तैयार किया जा सकता है ,जो मानव बुद्धिमत्ता यानी इंटेलिजेंस के बराबर होगा। इस तकनीक के माध्यम से अल्गोरिदम सीखने, पहचानने, समस्या-समाधान, भाषा, लाजिकल रीजनिंग, डिजिटल डेटा प्रोसेसिंग,बायोइंफार्मेटिक्‍स तथा मशीन बायोलाजी को आसानी से समझा जा सकता है। इससे सबसे अधिक चिंता नौकरियों को लेकर ही लेकिन तकनीक बेहतर होने से रोजगार का खतरा नहीं है।ये बातें हल्द्वानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका, प्रभाव , मुद्दे और चुनौतियाँ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने कही। यू कास्ट देहरादून और एमआईईटी के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उदघाटन गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह चौहान, उच्च शिक्षा निदेशक प्रो.सीडी सूंठा , पूर्व संयुक्त निदेशक प्रो. बी .एस विष्ट , प्रो.शशि पुरोहित ने किया। कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्देश्य जीवन को आसान बनाना और सुविधा प्रदान करना है। ऐसे में नई तकनीक का दुनिया के हित में प्रयोग होना चाहिए।प्रोफेसर विनय विद्यालंकर ने कहा कि हमारे वेद पूरी तरह वैज्ञानिक हैं, जिसमें बुद्धि के सात सोपान बताए गए हैं जो मानव मस्तिष्क में ही है किसी मशीन में नहीं हो सकते। सेमिनार की मुख्य संयोजक प्रोफेसर रश्मि पंत ने कहा आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग सभी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने नई संभावनाओं को जन्म दिया है।महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर शशि पुरोहित ने कहा कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य के लिए एक टूल है । इसके जहां सकारात्मक पहलू हैं , वही नकारात्मक पहलू भी हैं। हमें इन नकारात्मक पहलुओं से स्वयं को बचाकर रखना होगा। प्रो. विनय ऋषिवाल रुहेलखंड यूनिवर्सिटी ने कहा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव है।आज पहले की अपेक्षा नवाचार कम होने लगा है।कृषि औद्योगिक क्षेत्र में इसका प्रयोग कम दिखाई दे रहा है। हम अपना समय इसके सकारात्मक पहलू पर खर्च नहीं कर रहे हैं।प्रोफेसर सी.डी.सूंठा निदेशक उच्च शिक्षा ने कहा कि डाटा स्टोरेज की समस्या एक बहुत बड़ी चुनौती है। आने वाले वर्षों में सभी लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर निर्भर हो जाएंगे और डिसीजन मेकिंग का कार्य भी मनुष्य नहीं कर पाएगा। यह आज हमको हर प्रकार की स्वतंत्रता दे रही है, लेकिन हमें सचेत रहना है। शिक्षा ,स्वास्थ्य, ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में जहां इसके लाभ है इसीलिए सरकार एआई को लाने का सभी क्षेत्रों में प्रयास कर रही है लेकिन साइबर क्राइम को रोकने की एक बड़ी चुनौती हमारे समाज के सामने है। सम्मेलन में देश भर से 160 से अधिक शोधपत्र पढ़े गए और शोध सार की पुस्तक का भी विमोचन किया गया।राष्ट्री संगोष्ठी के दूसरे दिन के मुख्य अतिथि डॉ. आर.एस भाकुनी उपनिदेशक उच्च शिक्षा उत्तराखंड ने कहा विज्ञान उसी ओर तरक्की करता है जिस ओर मनुष्य सोचता है। आज समाज में जो नई तकनीक आई है उससे कैसे लाभ उठाया जाए इस पर बेहतर ढंग से विचार करना चाहिए तभी उसका प्रयोग करना सार्थक होगा।

आज दूसरे दिन के प्रथम तकनीकी सत्र के अंतर्गत आमंत्रित अतिथि वक्ता प्रोफेसर चंद्रावती जोशी ने शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक, नकारात्मक प्रभाव और चुनौतियों पर विस्तार के साथ प्रकाश डाला। प्रोफेसर कमला भारद्वाज , सागर सिंह सिरोला और अन्य विषय विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों द्वारा एआई की विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। आनलाइन शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले वक्ताओं ने इस बात को प्रमुखता के साथ रखा एआई तकनीक के जहां कई लाभ है, वहीं कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी हैं । जैसे- एल्गोरिथम पूर्वाग्रह, डेटा सुरक्षा, परिनियोजन अंतराल समय, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता ,ब्लैक बॉक्स, कुशल श्रमिकों की कमी, धीमी प्रतिक्रिया, उच्च विकास लागत। इन चुनौतियों के समाधान से उद्यम के सभी क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियों का प्रभावी उपयोग करने में मौका उतना ही बेहतर होगा ।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के तहत आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित हुई जिसमें आयुषी( इंदिरा प्रियदर्शिनी राजकीय महिला महाविद्यालय, हल्द्वानी)ने पहला उत्कर्षा ( पंतनगर विश्वविद्यालय) ने दूसरा और तनुजा( महिला महाविद्यालय हल्द्वानी) ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। शोध पत्र प्रस्तुतीकरण में नेहा विनवाल ने प्रथम, अंजली शुक्ला ने द्वितीय, आर्या कौशिक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

समापन पर डॉ प्रदीप पांडे द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन पर संगोष्ठी की मुख्य संयोजक प्रोफेसर रश्मि पंत ने कालेज की प्राचार्या प्रो.शशि पुरोहित समेत सम्मानित अतिथियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के साथ ही कालेज की पूरी टीम का धन्यवाद किया और कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से विभिन्न विषयों में इसके उपयोग को जानने के बेहतरीन मौके सभी को मिले ।