नैनीताल, 26 फरवरी।
फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई जाएगी। इस दिन प्रातः 11 बजकर 32 मिनट तक एकादशी का विशेष पुण्यकाल रहेगा। आमलकी (आंवला) एकादशी के अवसर पर व्रत, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर विष्णु सहस्त्रनाम का जप करते हैं। मान्यता है कि इस दिन निम्न मंत्र के श्रद्धापूर्वक उच्चारण से विष्णु सहस्त्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है—
“राम रामेति, रमे रामे मनोरमे;
सहस्त्र नाम ततुल्यं, राम नाम वरानने।”
आंवला पूजन और परिक्रमा का विधान
आमलकी एकादशी पर आंवला वृक्ष का विशेष पूजन किया जाता है। श्रद्धालु आंवला के पेड़ की 108 या 28 बार परिक्रमा कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। यदि आंवला का वृक्ष उपलब्ध न हो तो मंदिर में आंवला फल अर्पित कर पूजन करने का भी विधान है।
रंग और चीर बंधन की परंपरा
कई स्थानों पर इस दिन से होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है। परंपरा के अनुसार रंग डालने और ‘चीर बंधन’ की रस्म भी निभाई जाती है, जिससे फाल्गुनी उत्सव का माहौल प्रारंभ हो जाता है।
इन नियमों का रखें ध्यान
एकादशी के दिन बाल कटवाना वर्जित माना गया है।
चावल तथा सेम (बीन) की सब्जी का सेवन नहीं किया जाता।
सात्विक आहार एवं भगवान विष्णु के नाम-स्मरण का विशेष महत्व है।
धर्माचार्यों के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया आमलकी एकादशी व्रत समस्त पापों का नाश कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।





