कुमाऊँ विश्वविद्यालय में शोध प्रकाशन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु दिशा-निर्देशों को मंजूरी.. रिपोर्ट- (सुनील भारती) ” स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल की विद्या परिषद की बैठक शुक्रवार को आयोजित हुई, जिसमें विश्वविद्यालय में शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों को स्वीकृति प्रदान की गई। परिषद ने इसे विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम कदम बताया।

बैठक की शुरुआत परिषद के सदस्यों के स्वागत के साथ हुई। पूर्व बैठक (24 अगस्त 2025) के कार्यवृत्त की पुष्टि की गई तथा 30 अक्टूबर 2025 को आयोजित दीक्षांत समारोह संबंधी बैठक की कार्यवाही की समीक्षा प्रस्तुत की गई। इसके अतिरिक्त, 26 फरवरी 2026 को हुई विश्वविद्यालय परीक्षा समिति की बैठक के कार्यवृत्त अनुमोदनार्थ परिषद के समक्ष रखे गए।

नियुक्ति और पदोन्नति में शोध गुणवत्ता को प्राथमिकता

बैठक में शैक्षणिक वर्ग की नियुक्ति एवं पदोन्नति के लिए शोध प्रकाशनों की मान्यता से जुड़े दिशा-निर्देशों पर विस्तृत चर्चा हुई। परिषद को बताया गया कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक मानकों, विश्वसनीयता और वैश्विक प्रतिष्ठा के लिए गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन अनिवार्य हैं। इसी उद्देश्य से एक मानकीकृत एवं पारदर्शी मूल्यांकन ढांचा तैयार किया गया है।

इस संदर्भ में कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत द्वारा प्रो. आर. सी. जोशी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। समिति में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। समिति की संस्तुतियों के अनुसार विज्ञान संकाय में नियुक्ति एवं पदोन्नति के लिए केवल स्कोपस/एससीआई सूचकांकित जर्नलों में प्रकाशित शोध पत्रों को ही मान्यता दी जाएगी।

कला एवं मानविकी के लिए अलग सूची

कला एवं मानविकी विषयों के लिए स्कोपस सूचकांकित जर्नलों के अतिरिक्त चयनित गुणवत्ता-आधारित पत्रिकाओं की एक पृथक सूची तैयार की गई है, जिसे “कुमाऊँ यूनिवर्सिटी लिस्टेड जर्नल्स” नाम दिया गया है। इस सूची के निर्माण में हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का सहयोग लिया गया, ताकि केवल प्रमाणिक एवं गुणवत्ता-सम्पन्न पत्रिकाओं को ही सूचीबद्ध किया जा सके।

साथ ही, पुस्तकों के प्रकाशन को लेकर भी दिशा-निर्देश विकसित किए जा रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि विश्वविद्यालय के शिक्षक केवल प्रतिष्ठित और गुणवत्ता-आधारित प्रकाशनों में ही अपनी शोध कृतियां प्रकाशित करें।

गुणवत्ता ही होगी प्राथमिकता: कुलपति

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. रावत ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान और वैश्विक प्रतिष्ठा का मूल आधार होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रकाशनों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, प्रामाणिकता और सामाजिक उपयोगिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बैठक का संचालन कुलसचिव डॉ. एम. एस. मन्द्रवाल ने किया। यह बैठक हाइब्रिड मोड में सम्पन्न हुई, जिसमें विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, प्रोफेसरगण, विभागाध्यक्ष एवं आमंत्रित सदस्य उपस्थित रहे।