नैनीताल। रंगों के पर्व से पूर्व नगर का ऐतिहासिक राम सेवक सभा और नयना देवी मंदिर परिसर होली की सुरमयी बयार से महक उठा।
खेतीखान (चम्पावत) से डॉ. देवेंद्र ओली के नेतृत्व में पहुँची टीम ने माँ बाराही को समर्पित पारंपरिक होली “तुम तो भये तपवान बाराही, काशी में अवतार भयो” से कार्यक्रम का भावपूर्ण शुभारंभ किया।
मंदिर परिसर में गूंजते रागों ने श्रद्धा और उत्सव का अद्भुत संगम रच दिया।
मुंबई से नैनीताल घूमने पहुँची सैलानी नागवेणी माथुर ने कहा कि यहाँ के लोग बड़े आदर और आत्मीयता के साथ होली मनाते हैं, जबकि उनके शहर में होली के दिन घर से बाहर निकलना कठिन हो जाता है।
वहीं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नैनीताल के जहूर आलम प्रतिष्ठित थिएटर निर्देशक ने बताया
कि चम्पावत से आए होल्यारों द्वारा गाई जाने वाली गौरवशाली खड़ी होली की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पर्व सभी धर्मों के लोग मिलजुल कर मनाते हैं, जो नैनीताल की गंगा-जमुनी संस्कृति का परिचायक है।
अपराह्न तीन बजे से राम सेवक सभा, मल्लीताल में खड़ी बोली की होलियों की श्रृंखला आरंभ हुई, जिसने श्रोताओं को लोकधुनों की मिठास में सराबोर कर दिया। वरिष्ठ होल्यार किशोर जुकारिया और कैलाश सेलिया सहित टीम प्रभारी डॉ. देवेंद्र ओली तथा वरिष्ठ समाजसेविका अमिता साह को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान तालियों की गूंज ने आयोजन के उत्साह को और बढ़ा दिया।
कार्यक्रम की विशेषता नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी रही।
युगमंच द्वारा आयोजित होली गायन कार्यशाला में प्रशिक्षित बाल होल्यारों ने मनोहारी प्रस्तुतियाँ दीं। इसके बाद भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय के बच्चों ने खड़ी और बैठ होली प्रस्तुत कर पारंपरिक शैली को जीवंत कर दिया।
नन्हे कलाकारों ने भी रंग जमाया।
अमेरिकन किड्स के बच्चों का स्वांग, वृंदावन डांस म्यूजिक अकेडमी की नृत्य प्रस्तुति तथा नैनी महिला जागृति संस्था की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को बहुरंगी आयाम प्रदान किए।इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल, विधायक सरिता आर्य, जगदीश बवाड़ी, ज़हूर आलम, विमल चौधरी, मुकेश जोशी, मोहित साह, डी.के. शर्मा, हरीश राणा, जीतेन्द्र बिष्ट, राजीव लोचन साह, अशोक साह, मिथिलेश पांडे, राजू साह, निरंजन साह, नवीन बेगाना, भास्कर बिष्ट, नीरज डालाकोटी, रफत आलम, डॉ. हिमांशु पांडे, जय जोशी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। विभिन्न महिला समूहों और समाजसेवियों की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को सामुदायिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
होली के सुरों से सजा यह आयोजन न केवल परंपरा का उत्सव बना, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि नैनीताल में संस्कृति की धारा नई पीढ़ी के साथ निरंतर प्रवाहित हो रही है।







