राष्ट्रीय विज्ञान दिवस ..
विशेष-प्रोफेसर ललित तिवारी.. (स्टार खबर) नैनीताल
नैनीताल | विज्ञान चेतना का उत्सव भारत में प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन द्वारा खोजे गए रमन प्रभाव की स्मृति में समर्पित है। उनकी इस अद्वितीय खोज के लिए उन्हें वर्ष 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विज्ञान के क्षेत्र में भारत की यह उपलब्धि विश्व पटल पर एक ऐतिहासिक क्षण थी।
भारत सरकार ने 28 फरवरी 1986 को इस दिवस को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस घोषित किया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को विज्ञान के प्रति प्रेरित करना तथा समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है।
●राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 की थीम
“विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत को गति देने वाली शक्ति”
यह थीम महिला सशक्तिकरण को समर्पित है। इसका उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करना है। विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति देश की प्रगति का सशक्त संकेत है।
* विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा
भारतीय पुराणों और शास्त्रों में भी आधुनिक विज्ञान के कई संकेत प्रतीकात्मक रूप में मिलते हैं।
ब्रह्मांड की उत्पत्ति को विस्फोट सिद्धांत से जोड़कर देखा जाता है।
खगोल विज्ञान में ग्रह-नक्षत्रों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
वायु पुराण में भौगोलिक और खगोलीय विवरणों का उल्लेख है।
समय की विस्तृत गणना, सृष्टि विकास और जीव विज्ञान के संकेत अन्य पुराणों में मिलते हैं।
यह दर्शाता है कि भारत की ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक चिंतन का गहरा आधार रहा है।
* वैज्ञानिक दृष्टिकोण का महत्व
> “विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिः तत्परता क्रिया।
यस्यैते षड्गुणास्तस्य नासाध्यमतिवर्तते॥”
अर्थात ज्ञान, तर्क, विज्ञान, स्मरण, तत्परता और कर्म — इन छह गुणों से युक्त व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
> “जाड्यं धियो हरति सिंचति वाचि सत्यं”
विज्ञान बुद्धि की जड़ता को दूर करता है और वाणी में सत्य का संचार करता है।
> “अयम निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम्”
विज्ञान संकीर्णता से ऊपर उठकर पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखता है।
●विकसित भारत 2047 की ओर
वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में वैज्ञानिक सोच और नवाचार मूल स्तंभ होंगे। यदि वैज्ञानिक आविष्कार न हुए होते तो मानव जीवन आज भी अंधकार में होता। उदाहरणस्वरूप, यदि महान आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन ने विद्युत बल्ब का आविष्कार न किया होता, तो आधुनिक सभ्यता की रफ्तार की कल्पना करना कठिन होता।
आज आवश्यकता है कि अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया जाए तथा युवा पीढ़ी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सशक्त किया जाए।







