भारतीय साहित्य और भाषा विषयक पुनश्चर्या कार्यक्रम का समापन, बहुभाषिकता और तकनीक-सम्मत शिक्षा पर जोर.. रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर” नैनीताल..

5

नैनीताल,। नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के यूजीसी–एमएमटीटीसी द्वारा 9 मार्च से 24 मार्च 2026 तक आयोजित ‘भारतीय साहित्य और भाषा’ विषयक पुनश्चर्या कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हो गया।समापन समारोह के मुख्य अतिथि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह समापन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण बौद्धिक यात्रा का पड़ाव है। उन्होंने भाषा और साहित्य को समाज की चेतना, संस्कृति और इतिहास का सशक्त माध्यम बताते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में मातृभाषा की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया और इसके क्रियान्वयन की चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।प्रो. लोहनी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में बहुभाषिकता अनिवार्य हो गई है। उन्होंने अंग्रेजी, फ्रेंच, जापानी और मंदारिन जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता बताई। साथ ही डिजिटल युग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भाषा-अध्ययन को अधिक संवादपरक, तकनीक-सम्मत और समावेशी बनाने पर जोर दिया।एमएमटीटीसी के सह-निदेशक प्रो. रीतेश साह ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान हुए संवाद और विचार-विमर्श ने प्रतिभागियों में नई शैक्षणिक ऊर्जा का संचार किया है। उन्होंने अध्यापन और शोध को नवाचार, बहुभाषिकता और तकनीकी सशक्तता से जोड़ने की आवश्यकता बताई।निदेशक प्रो. दिव्या यू. जोशी ने जानकारी दी कि लगभग पखवाड़े तक चले इस आयोजन में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, हरियाणा, छत्तीसगढ़, दिल्ली, बिहार और हिमाचल प्रदेश सहित दस राज्यों से प्रतिभागियों ने छह भाषाओं के माध्यम से सक्रिय सहभागिता की, जिससे कार्यक्रम को बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक आयाम प्राप्त हुआ।रिफ्रेशर कोर्स समन्वयक प्रो. एल. एम. जोशी ने बताया कि कार्यक्रम की विशेषता देश-विदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विद्वानों, भाषाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों के व्याख्यान रहे, जिन्होंने प्रतिभागियों को समकालीन साहित्यिक एवं भाषाई विमर्शों से जोड़ा।कार्यक्रम का संचालन डे ऑफिसर चंद्रिका चौधरी ने किया।
कार्यक्रम की सफलता में डॉ. राजेंद्र बोरा, जितेंद्र बिष्ट, जसौद बिष्ट, इंद्र सिंह नेगी, अरविंद सिंह, कैलाश जोशी, राजेंद्र बिष्ट, कमल और सुरेंद्र सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।