कुमाऊं यूनिवर्सिटी में रिजल्ट और पीएचडी प्रवेश पर घमासान… प्रशासन ने विज्ञापन रोका, ज़ूलॉजी में 37% छात्र फेल… रिपोर्ट- (सुनील भारती) “स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणामों और पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। छात्रों के भारी विरोध और परिणामों में विसंगतियों के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएचडी के वर्तमान विज्ञापन को तत्काल प्रभाव से ‘विथहोल्ड’ (रोक) करने का फैसला किया है।

ज़ूलॉजी और कॉमर्स के नतीजों ने चौंकाया, कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान सिंह रावत ने बताया ‘हमें पता था’
यूनिवर्सिटी के परीक्षा परिणामों में इस बार ज़ूलॉजी और कॉमर्स के विषयों में छात्रों का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। आंकड़ों के मुताबिक
ज़ूलॉजी के एक पेपर में लगभग 36% से 37% छात्र अनुत्तीर्ण हुए हैं।उन्होंने बताया
यूनिवर्सिटी प्रशासन को रिजल्ट घोषित करने से पहले ही इस स्थिति की जानकारी थी, आंकड़ों के विश्लेषण के कारण ही रिजल्ट जारी करने में देरी हुई थी,और छात्रों की मांग पर अब होगा दोबारा मूल्यांकन किया ज्यागा।

रिजल्ट से असंतुष्ट छात्रों की मांग को मानते हुए प्रशासन दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा। विश्वविद्यालय अब प्रभावित विषयों के पेपर्स का पुनर्मूल्यांकन करवाने के लिए तैयार हो गया है। इससे पहले कॉलेज स्तर पर एक बार ‘री-एग्जामिनेशन’ कराया गया था, लेकिन छात्रों की मांग पुख्ता मूल्यांकन की थी।

●पीएचडी एंट्रेंस पर छिड़ा विवाद:
●क्यों जरूरी है अलग प्रवेश परीक्षा?

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान सिंह रावत ने स्थानीय छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पीएचडी एंट्रेंस की वकालत की है। उन्होंने बताया यूनिवर्सिटी दूरस्थ क्षेत्र में है, जहाँ के छात्र अक्सर नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में क्वालीफाई नहीं कर पाते। उन्होंने बताया
यदि केवल राष्ट्रीय मानकों पर दाखिला हुआ, तो या तो बाहरी छात्र सीटें ले जाएंगे या यूनिवर्सिटी की सीटें खाली रह जाएंगी।
उन्होंने बताया उच्च शिक्षा विभाग ने एंट्रेंस की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में नीतियों में बदलाव के कारण इसे रोक दिया गया। इस ‘थॉट प्रोसेस’ में आए बदलाव के कारण छात्रों में भारी असंतोष था। वहीं
ताजा फैसला में छात्रों की मांग पर प्रशासन ने वर्तमान पीएचडी विज्ञापन को रोक दिया है।
उन्होंने बताया खाली सीटों को भरने और प्रवेश परीक्षा दोबारा शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन अब शासन (सरकार) के साथ पत्राचार करेगा। वहीं छात्र परिषद के जिला संयोजक धीरज गडकोटी ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो छात्र हितों की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है, जहाँ एक तरफ वह छात्रों के गुस्से को शांत करने के लिए पुनर्मूल्यांकन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पीएचडी प्रवेश के नियमों को लेकर सरकार से स्पष्टता की मांग कर रहा है। इस दौरान विभाग संगठन मंत्री कैलाश सिंह बिष्ट जिला संयोजक धीरज गड़कोटी , मोहित पंत , यतिन पाण्डेय, आर्यन बेलवाल, धीरज बिष्ट, चेतन बिष्ट , देव चौहान मौजूद रहे।