विशेष… भिटौली पर्व पर बिटिया को दिया स्नेह और परंपरा का उपहार.. विशेष- राजीव पांडे (खीमदा )..

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नैनीताल। चैत्र मास के पावन अवसर पर आज क्षेत्र में पारंपरिक लोक पर्व भिटौली श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर परिवारों ने अपनी बेटियों और बहनों को स्नेह स्वरूप भिटौली भेंट की, जो पहाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
भिटौली पर्व विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मनाया जाता है, जिसमें चैत्र माह के दौरान बेटियों को घर बुलाकर या उनके ससुराल जाकर उपहार, मिठाई और पारंपरिक पकवान दिए जाते हैं। यह पर्व परिवारिक स्नेह, अपनत्व और रिश्तों की मजबूती का संदेश देता है।
इस परंपरा में एक विशेष व्यंजन ‘स्याही’ (शै) का महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसे फूलदेई के दिन एकत्र किए गए चावलों को पीसकर और उसमें गुड़ मिलाकर तैयार किया जाता है। बाद में चैत्र मास में इसे पकाकर बेटियों और परिजनों को प्रेमपूर्वक खिलाया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी यह परंपरा पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती है। लोग इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से जुड़े रहने का माध्यम मानते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भिटौली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भावनाओं का प्रतीक है, जो दूर रह रही बेटियों को अपने मायके से जोड़ने का कार्य करता है।
हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा—इसी में हमारी पहचान निहित है।