नैनीताल।
भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना से भी पूर्व, ईस्ट इंडिया कम्पनी के दौर में उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य जर्मनी से आए तीन प्रसिद्ध स्लांगिनवाईट बन्धुओं ने हिमालयी क्षेत्रों के सर्वेक्षण हेतु भारत का ऐतिहासिक दौरा किया था। इस अभियान में उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्र के प्रसिद्ध सर्वेयर पंडित नैन सिंह रावत भी शामिल थे, जो उस समय अपने कैरियर की शुरुआत कर रहे थे।
सर्वेक्षण यात्रा के दौरान स्लांगिनवाईट बन्धुओं द्वारा हिमालयी क्षेत्रों की अनेक महत्वपूर्ण पेंटिंग्स तैयार की गई थीं। इन दुर्लभ चित्रों में तत्कालीन हिमालयी जनजीवन, संस्कृति, रहन-सहन और प्राकृतिक परिवेश की झलक देखने को मिलती है।
हालांकि उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों और उथल-पुथल के चलते ये अमूल्य पेंटिंग्स जर्मनी के संग्रहालयों तक ही सीमित रह गई थीं। अब करीब 170 वर्षों बाद इन ऐतिहासिक पेंटिंग्स को भारत लाया गया है।
इनकी प्रदर्शनी पहले दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर तथा देहरादून के दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित की जा चुकी है। अब आगामी 12 मई 2026 से यह विशेष प्रदर्शनी नैनीताल स्थित सी०आर०एस०टी० इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित की जाएगी।
प्रदर्शनी के दौरान पद्मश्री डॉ० शेखर पाठक, पद्मश्री अनूप साह तथा राजीव लोचन साह इन ऐतिहासिक चित्रों और उनसे जुड़े हिमालयी इतिहास पर विस्तार से जानकारी देंगे।
यह प्रदर्शनी इतिहास, संस्कृति और हिमालयी विरासत में रुचि रखने वाले लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।







