हरियाली अमावस्या आज, स्नान-दान और तर्पण का रहेगा विशेष महत्व.. एक ही दिन धार्मिक आस्था और खगोलीय घटना का संगम, भारत में नहीं दिखेगा साल का अंतिम सूर्य ग्रहण… विशेष- राजीव पांडे ( खीमदा) “स्टार खबर” नैनीताल

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नैनीताल। सावन मास की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या बुधवार, 12 अगस्त को मनाई जाएगी। धार्मिक दृष्टि से अमावस्या को स्नान, दान, तर्पण और पितरों के स्मरण के लिए विशेष माना गया है। हरियाली अमावस्या पर श्रद्धालु पवित्र स्नान के बाद अन्न, वस्त्र सहित जरूरतमंदों को सामर्थ्य के अनुसार दान करेंगे। वहीं पितरों के निमित्त तर्पण और पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।
हरियाली अमावस्या का प्रकृति से भी गहरा संबंध माना जाता है। इस दिन पौधारोपण और पेड़-पौधों की सेवा को शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किए गए दान-पुण्य और तर्पण का विशेष फल प्राप्त होता है।

आज ही लगेगा वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण

हरियाली अमावस्या के दिन ही वर्ष 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण भी होगा। खगोलीय गणना के अनुसार ग्रहण 12 अगस्त की रात शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह तक चलेगा। इसका चरम मध्यरात्रि के आसपास रहेगा।
हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण का दृश्य मुख्य रूप से दुनिया के कुछ उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। ऐसे में हरियाली अमावस्या पर स्नान, दान, तर्पण और अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।

धार्मिक आस्था के साथ खगोलीय घटना भी खास

एक ओर जहां 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या के चलते मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की गतिविधियां बढ़ेंगी, वहीं दूसरी ओर इसी दिन होने वाला सूर्य ग्रहण खगोल प्रेमियों के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण लोग इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकेंगे।
खगोलविदों के अनुसार सूर्य ग्रहण को कभी भी नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए। जिन क्षेत्रों में ग्रहण दिखाई देगा, वहां सुरक्षित सोलर फिल्टर या प्रमाणित ग्रहण चश्मे का इस्तेमाल करना आवश्यक होगा।