22 साल पुराने डंपिंग जोन हटाने की मांग, हाई कोर्ट ने NGT जाने की दी छूट.. हरिद्वार-ऋषिकेश में 2027 के कुंभ को देखते हुए दायर की गई थी जनहित याचिका.. रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल। वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ मेले को देखते हुए हरिद्वार और ऋषिकेश में बने डंपिंग जोन को हटाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। नेशनल पब्लिक ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि डंपिंग जोन में बड़ी मात्रा में कचरा व अन्य सामग्री एकत्र की जा रही है, जिससे आसपास के लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि संबंधित डंपिंग जोन स्कूलों और रिहायशी क्षेत्रों के आसपास स्थित हैं। यहां लंबे समय से कचरा एकत्र किए जाने के कारण संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि कचरे से जुड़े मामलों के चलते क्षेत्र में 22 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन समस्या के समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
याचिका में कहा गया कि संबंधित डंपिंग जोन करीब 22 वर्षों से अस्तित्व में हैं। पूर्व में स्थानीय लोगों की ओर से भी इनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किए जा चुके हैं और इस संबंध में समाचार पत्रों में भी खबरें प्रकाशित होती रही हैं। इसके बावजूद अब तक डंपिंग जोन हटाने को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि इसी विषय से संबंधित अन्य जनहित याचिकाएं पहले से ही लंबित हैं। साथ ही, संबंधित मामले की सुनवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चल रही है। ऐसे में न्यायालय ने याचिकाकर्ता को एनजीटी के समक्ष नई प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने अथवा लंबित कार्यवाही में पक्षकार बनने की स्वतंत्रता दी, ताकि मामले की सुनवाई वहीं की जा सके।
याचिकाकर्ता की मुख्य मांग है कि कुंभ मेले से पहले हरिद्वार और ऋषिकेश के रिहायशी व शैक्षणिक क्षेत्रों के समीप स्थित डंपिंग जोन को हटाया जाए और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की निर्धारित गाइडलाइंस का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जाए।