नैनीताल। जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र में जून के अंतिम सप्ताह से फैल रही जलजनित बीमारी अब गंभीर रूप लेती जा रही है। डायरिया, उल्टी-दस्त और टायफाइड के बाद अब पीलिया के गंभीर मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीती रात क्षेत्र में एक 16 वर्षीय किशोर और 26 वर्षीय विवाहिता की मौत हो गई। दोनों मौतों के बाद क्षेत्र में शोक के साथ ही बीमारी को लेकर दहशत का माहौल है।

सरियाताल निवासी 16 वर्षीय रितेश जीना को 18 अगस्त से टायफाइड, उल्टी-दस्त की शिकायत थी। परिजनों के अनुसार उसका उपचार चल रहा था, लेकिन 28 अगस्त को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उसे हल्द्वानी के कई निजी अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के एलबीएस अस्पताल और एम्स के लिए रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने लीवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी।
रितेश के ताऊ बीएस जीना के अनुसार निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च एक करोड़ रुपये से अधिक बताया गया। परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना संभव नहीं था। बाद में रितेश को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार देर शाम उसकी मौत हो गई। परिवार ने अपना इकलौता और मेधावी बेटा खो दिया।
दूसरी घटना में 26 वर्षीय विवाहिता की भी पीलिया से मौत हो गई। मृतका के पीछे चार वर्ष और डेढ़ वर्ष की दो छोटी बेटियां हैं। वहीं, मृतका के परिवार के पांच अन्य सदस्य भी पीलिया से पीड़ित बताए जा रहे हैं। एक ही परिवार में बीमारी के कई मामले सामने आने से ग्रामीणों में चिंता और बढ़ गई है।
क्षेत्र में लगातार जलजनित बीमारी के मामले सामने आने और अब दो लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट का कहना है कि बीमारी जून के अंतिम सप्ताह में शुरू हुई थी। उनका आरोप है कि शुरुआती दौर में इसे गंभीरता से नियंत्रित नहीं किया गया। डायरिया और उल्टी-दस्त के बाद टायफाइड और अब पीलिया के गंभीर मामले सामने आने से स्वास्थ्य तथा पेयजल व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने क्षेत्र में बीमारी के वास्तविक स्रोत की जांच कराने, पेयजल की गुणवत्ता की जांच और प्रभावित परिवारों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।



