उत्तराखंड की लोक गाथाएँ बनेंगी सिनेमा की ताक़त हेमंत पांडे बोले – कुमाऊँनी-गढ़वाली फिल्मों से ही बचेगी पहाड़ की संस्कृति. रिपोर्ट- (सुनील भारती) “स्टार खबर ” नैनीताल..

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नैनीताल।
बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता हेमंत पांडे शुक्रवार को नैनीताल पहुँचे, जहाँ उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में उत्तराखंड की संस्कृति, भाषा और युवाओं को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर पहाड़ की लोक संस्कृति और धरोहर को बचाना है, तो इसके लिए कुमाऊँनी और गढ़वाली भाषाओं में सशक्त सिनेमा का निर्माण बेहद ज़रूरी है।

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हेमंत पांडे ने साफ शब्दों में कहा कि उत्तराखंड की मिट्टी में कहानियों की कोई कमी नहीं है। यहाँ दुःख, संघर्ष, प्रेम, पलायन और लोक गाथाओं से जुड़ी अनगिनत कहानियाँ मौजूद हैं, बस ज़रूरत है उन्हें तकनीकी रूप से मज़बूत तरीके से पर्दे पर उतारने की।

“फिल्म सब्सिडी से बढ़ा निर्माताओं का हौसला”

अभिनेता हेमंत पांडे ने प्रदेश सरकार की फिल्म नीति की सराहना करते हुए कहा कि
उत्तराखंड सरकार द्वारा फिल्मों के लिए दी जा रही सब्सिडी से स्थानीय फिल्म निर्माताओं का मनोबल बढ़ा है।
इससे न सिर्फ पहाड़ में फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को भी रोज़गार के अवसर मिल रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि अगर इस नीति को और मजबूत किया जाए, तो उत्तराखंड फिल्म टूरिज़्म और रीजनल सिनेमा का बड़ा केंद्र बन सकता है।

“पहाड़ों में खुले NSD जैसे संस्थान – हेमंत पांडे”

युवाओं को लेकर हेमंत पांडे ने एक अहम सुझाव देते हुए कहा कि
उत्तराखंड की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में NSD (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) और नेशनल स्कूल ड्रामा जैसी संस्थाओं की स्थापना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि पहाड़ के युवाओं में अभिनय और रंगमंच की जबरदस्त प्रतिभा है, लेकिन संसाधनों और प्रशिक्षण के अभाव में वह सामने नहीं आ पाती।
अगर पहाड़ों में ही ऐसे संस्थान खुलें, तो युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँच सकते हैं।

“संस्कृति बचेगी तो पहाड़ बचेगा”

हेमंत पांडे ने अंत में कहा कि
उत्तराखंड की पहचान उसकी भाषा, लोक संस्कृति और कहानियाँ हैं।
अगर सिनेमा के माध्यम से इन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाया गया, तो न सिर्फ संस्कृति बचेगी बल्कि पलायन जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगेगा।