व्रत और त्यौहार..
विशेष- राजीव पांडे..
कल दिनांक 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन एक साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माने जाते हैं।
विजया एकादशी व्रत
यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस एकादशी का विधिपूर्वक व्रत रखने से जीवन के सभी संकटों पर विजय प्राप्त होती है और पापों का नाश होता है। विजय एकादशी विशेष रूप से विजय, सफलता और शुभ कार्यों में सिद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है।
कुंभ संक्रांति
इस दिन सूर्य देव मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं। कुंभ संक्रांति को दान, स्नान और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। पवित्र नदियों में स्नान, तिल, गुड़, वस्त्र एवं अन्न दान का विशेष महत्व है।
सौर फाल्गुन मास का आरंभ
कुंभ संक्रांति के साथ ही सौर फाल्गुन मास का शुभारंभ होता है। यह मास उल्लास, भक्ति और होली जैसे पर्वों की भूमिका तैयार करता है। फाल्गुन मास को आनंद, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है।
विशेष संयोग का महत्व
विजया एकादशी, कुंभ संक्रांति और सौर फाल्गुन मास का एक ही दिन पड़ना अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी संयोग है। इस दिन किया गया व्रत, जप, तप, स्नान और दान कई गुना फल प्रदान करता है।
शुभकामनाएं
इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु एवं सूर्य देव की कृपा आप सभी पर बनी रहे, जीवन में विजय, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का वास हो।
विजया एकादशी एवं कुंभ संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।





