कुमाऊँ विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में संवादात्मक व्याख्यान.. अनुशासन, नेतृत्व और अंतरविषयक दृष्टि से ही बनेगा सशक्त व्यक्तित्व : कर्नल (डॉ.) मुनगली.. रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर ” नैनीताल..

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नैनीताल।
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में सोमवार को एक विशेष संवादात्मक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी कर्नल (डॉ.) गिरिजा शंकर मुनगली मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। व्याख्यान विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए जीवन-दर्शन, अकादमिक दृष्टि और सामाजिक उत्तरदायित्व को समझने का महत्वपूर्ण मंच बना।

अपने संबोधन में कर्नल (डॉ.) मुनगली ने कहा कि जीवन में प्रेरणा का मूल स्रोत व्यक्ति के भीतर होता है, किंतु उसे सुदृढ़ बनाने के लिए अनुशासन, निरंतर अभ्यास और स्पष्ट लक्ष्य आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को निर्णय-क्षमता विकसित करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों पर अडिग रहने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का वास्तविक निर्माण करती हैं।उन्होंने कहा कि साहस और धैर्य दीर्घकालिक सफलता की आधारशिला हैं। बुद्धि और विवेक के संतुलन से लिए गए निर्णय व्यक्ति को न केवल व्यक्तिगत सफलता दिलाते हैं, बल्कि उसे वैश्विक स्तर का नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा भी प्रदान करते हैं। उन्होंने नेतृत्वकारी गुणों के विकास को सफलता के लिए अनिवार्य बताया और कहा कि सक्षम नेतृत्व सामूहिक क्षमता को सार्थक उपलब्धियों में परिवर्तित करता है।इतिहास विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इतिहास को अंतरविषयक दृष्टिकोण से पढ़ना अत्यंत आवश्यक है। समाजशास्त्र, भूगोल, पर्यावरण अध्ययन और राजनीति विज्ञान के साथ इतिहास को जोड़कर देखने से अतीत की घटनाओं की समग्र समझ विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि जागरूक और उत्तरदायी नागरिक बनने की प्रक्रिया है।

संवाद सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने करियर निर्माण, शोध की दिशा, विदेश अध्ययन और जीवन संतुलन से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर कर्नल (डॉ.) मुनगली ने अपने अनुभवों के आधार पर दिया। उन्होंने असफलताओं को आत्मविकास का अवसर बताते हुए आत्ममंथन को व्यक्तित्व विकास की कुंजी बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत ने कहा कि कर्नल (डॉ.) मुनगली का जीवन विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाना भी है। उन्होंने राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करने का आह्वान किया तथा बहुविषयक दृष्टिकोण को अकादमिक विकास के लिए आवश्यक बताया।कार्यक्रम का शुभारंभ इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. संजय घिल्डियाल ने मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत करते हुए किया। उन्होंने बताया कि कर्नल (डॉ.) मुनगली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं और संस्थान से उनका गहरा अकादमिक व भावनात्मक जुड़ाव रहा है। वे इतिहास विषय के छात्र रहे तथा 1990 के दशक में पीएचडी हेतु शोध कार्य प्रारंभ किया था। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों का पुनः विश्वविद्यालय आकर विद्यार्थियों से संवाद करना सशक्त अकादमिक परंपरा का प्रतीक है।
अंत में प्रो. रीतेश साह ने मुख्य वक्ता, कुलपति, विभागाध्यक्ष सहित सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिवानी रावत ने किया।
इस अवसर पर प्रो. सावित्री क़ैड़ा जंतवाल, प्रो. संजय टम्टा, प्रो. एच.सी.एस. बिष्ट, प्रो. आर.सी. जोशी, प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. मनीषा, प्रो. हरिप्रिया, डॉ. गगनदीप होती, डॉ. रवि जोशी, डॉ. जितेंद्र, डॉ. हिमांशु, डॉ. हृदेश, डॉ. पूरन अधिकारी, डॉ. भुवन शर्मा, डॉ. हरदयाल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।