★. जिंदा मंत्री से लेकर मरहूम मंत्री तक बिजली विभाग को ठेंगा!
★.:आम जनता की बत्ती गुल मंत्री जी का मीटर चालु , सत्ता वालों पर मेहरबानी क्यों?
(चन्दन सिंह बिष्ट) “स्टार खबर”

अल्मोड़ा/सोमेश्वर : उत्तराखंड में कानून सबके लिए बराबर होने का दावा किया जाता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक तरफ आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल बकाया होते ही लाइन काटने की धमकी दी जाती है, दूसरी तरफ सत्ता के गलियारों में बैठे नेता लाखों रुपये दबाकर बैठ जाते हैं — और बिजली विभाग उनके आगे बेबस नजर आता है।
ताज़ा मामला बागेश्वर जिले का है, जहाँ यूपीसीएल द्वारा जारी टॉप बकाएदारों की सूची में सीधे-सीधे सत्ता पक्ष के बड़े नाम सामने आए हैं। इस सूची में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या का नाम शामिल है। कौसानी स्थित उनके होटल “रुद्राक्ष पैलेस” पर करीब 2 लाख 98 हजार रुपये से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है।
सवाल ये है कि आम आदमी पर बिजली विभाग का डंडा मिनटों में चल जाता है, लेकिन मंत्री जी पर कार्रवाई करने की हिम्मत किसी अधिकारी में क्यों नहीं?
इतना ही नहीं, टॉप बकाएदारों की लिस्ट में पूर्व मंत्री और विधायक चंदन रामदास का नाम भी दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि उनके निधन के काफी समय बाद भी उनके नाम का करीब 2 लाख 85 हजार रुपये का बिजली बिल अब तक जमा नहीं हुआ। परिवार की ओर से आज तक इस बकाए को चुकाने की जहमत नहीं उठाई गई।
यह मामला सिर्फ बिजली बिल का नहीं है, बल्कि सिस्टम में घुसी सियासी दबंगई का जीता-जागता उदाहरण है। अगर किसी आम दुकानदार या किसान पर इतना बकाया होता, तो अब तक कनेक्शन काट दिया जाता, जुर्माना ठोक दिया जाता और नोटिस पर नोटिस थमा दिए जाते।
यहां सवाल यूपीसीएल के अधिकारियों पर भी उठता है—
क्या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?
क्या नेताओं के लिए अलग नियम-कायदे बने हुए हैं?
हालांकि, बागेश्वर के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ने टॉप बकाएदारों की सूची अखबार में प्रकाशित कर जो हिम्मत दिखाई है, वह काबिल-ए-तारीफ है। सत्ता के दबाव के बावजूद सच्चाई को सार्वजनिक करना अपने आप में जोखिम भरा कदम माना जाता है।
अब देखना ये है कि सरकार इस शर्मनाक खुलासे के बाद क्या कार्रवाई करती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार सरकार की छवि सुधारने की बात करते हैं, लेकिन उनके ही मंत्री और नेता सरकार की साख पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।
अगर मुख्यमंत्री सच में “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर चलते हैं, तो सबसे पहले इन वीआईपी बकाएदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए—
बिजली बिल वसूला जाए, और नियम सबके लिए बराबर साबित किया जाए। वरना जनता यही कहेगी: “कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है, ताकतवरों के लिए नहीं!”







