कदली वृक्ष की अगवानी से भक्तिमय हुआ नैनीताल.. मंगोली से सूखाताल पहुंचा कदली वृक्ष, वैष्णवी देवी मंदिर में पूजा के बाद निकला नगर भ्रमण; 19 सितंबर को नंदा अष्टमी पर होंगे दर्शन… रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर ” नैनीताल..

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नैनीताल। 124वें श्री नंदा देवी महोत्सव के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों के तहत गुरुवार को कदली वृक्ष को मंगोली से नैनीताल लाया गया। कदली वृक्ष के नगर में पहुंचते ही श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। सूखाताल में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद कदली वृक्ष को तल्लीताल स्थित वैष्णवी देवी मंदिर ले जाया गया। यहां पूजन के उपरांत श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कदली वृक्ष का नगर भ्रमण नंदा देवी महोत्सव की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में शामिल है। लोक मान्यता और महोत्सव की परंपरा के अनुसार कदली वृक्ष से मां नंदा और सुनंदा की पारंपरिक प्रतिमाओं के निर्माण की प्रक्रिया जुड़ी हुई है। इसी धार्मिक भाव के साथ कदली वृक्ष को सम्मानपूर्वक नगर में लाकर विभिन्न अनुष्ठान किए जाते हैं।

नगर भ्रमण और पूजन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कदली वृक्ष को प्रतिमा निर्माण स्थल तक पहुंचाया गया। शुक्रवार 18 सितंबर को कदली वृक्ष से नंदा-सुनंदा की पारंपरिक प्रतिमाओं को आकार देने का काम शुरू होगा। कारीगर धार्मिक विधि-विधान के अनुरूप प्रतिमाओं का निर्माण करेंगे। इसके बाद 19 सितंबर को नंदा अष्टमी के अवसर पर शुभ मुहूर्त में प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इसी के साथ श्रद्धालुओं के लिए मां नंदा-सुनंदा के दर्शन का क्रम शुरू होगा।

कदली वृक्ष की परंपरा का अलग महत्व

नंदा देवी महोत्सव में कदली वृक्ष को केवल यात्रा के प्रतीक के रूप में नहीं देखा जाता। यह प्रतिमाओं के निर्माण की धार्मिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। कुमाऊं की लोक आस्था में मां नंदा को क्षेत्र की आराध्य देवी के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। कदली वृक्ष को देवी स्वरूप मानकर उसके आगमन, पूजन और नगर भ्रमण की परंपरा निभाई जाती है। यही वजह है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालु इसे श्रद्धा के साथ नमन करते हैं।

23 सितंबर को निकलेगी डोला यात्रा

श्री नंदा देवी महोत्सव के तहत 16 से 23 सितंबर तक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं के निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालु दर्शन करेंगे। महोत्सव के अंतिम चरण में 23 सितंबर को नंदा-सुनंदा का डोला नगर भ्रमण पर निकलेगा। विभिन्न मार्गों से होते हुए डोला यात्रा के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।