हाई कोर्ट शिफ्टिंग….पहाड़ से मैदान में हाईकोर्ट को शिफ्ट करने का नैनीताल में विरोध सड़कों पर उतरे वकील व्यापारी और सामाजिक संगठन के लोग….रैली में शामिल लोगों ने जताया अंदेशा कहीं धामी सरकार को पहाड़ विरोधी साबित करने का तो नही खेला जा रहा है खेल…

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय को अन्यत्र शिफ्ट करना पूरी तरह से ग़ैरकानूनी..वकीलों के साथ सामाजिक संगठनों और व्यापारियों ने जताया विरोध…

आज सरोवर नगरी नैनीताल में उत्तराखंड उच्च न्यायालय को अन्यत्र स्थानांतरित करने के विरोध में बार एसोसिएशन द्वारा कड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया।हालांकि उक्त विरोध प्रदर्शन में बार एसोसिएशन से अधिवक्ताओं के साथ सामाजिक संगठनों और व्यापारियों ने भी भाग लिया इस दौरान सभी ने एक स्वर में हाई कोर्ट को शिफ्ट करने का विरोध किया है। इस दौरान इस विरोध प्रदर्शन में बड़ा बाजार के व्यवसायियों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।प्रदर्शनकारियों ने पर्वतीय राज्य से उच्च न्यायालय का पलायन किये जाने पर गहरी आपत्ति दर्ज की।और सवाल खड़े किए कि क्या उत्तराखंड में ऐसे रुकेगा पलायन..? वक्ताओं ने कहा कि सरकार को पहाड़ में संस्थान खोलने होंगे बजाए यहां से शिफ्टिंग के।  वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की धामी सरकार को पहाड़ विरोधी बताने के लिए हाई कोर्ट की शिफ्टिंग की कुछ षडयंत्रकारियों की साजिश है।

 

जहाँ सत्ताधारी पार्टी से जुड़े कुछ लोगों भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।वहीं प्रमुख विपक्षी दल काँग्रेस के पूर्व सांसद महेंद्र सिंह पाल ने मुख्यमंत्री के इस अकेले निर्णय के चलते हाई कोर्ट को स्थानांतरित करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इतने बड़े निर्णयों को प्रदेश पर ऐसे ही नही थोप सकती।इसके लिए कुछ नियम कानून होते है।अन्य अधिवक्ताओं ने मामले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती देने की अपनी मंशा भी जाहिर की।

क्यों 22 बरस बाद भी उच्च न्यायालय के पलायन का फैसला…

कुल मिलाकर नैनीताल में अब तक हाई कोर्ट में 872 करोड़ से ज्यादा खर्च सरकार कर चुकी है और अभी भी चैंबर निर्माण हो रहा हैं तो अन्य काम भी हो रहे हैं। हालांकि ये बात भी चर्चाओं में है कि शिफ्टिंग को लेकर जजों ने अपनी सहमति बिना बार एसोसिएशन के सरकार को भेज दी है लेकिन इसका विरोध भी वकीलों ने किया है। मामला तो यहां तक पहुंचा की हाई कोर्ट में वकीलों के दो गुट आमने सामने आ गए और बार एसोसिएशन को इस दौरान बैठक को कैंसिल करना पड़ा है। पहाड़ से मैदान में हाई कोर्ट को शिफ्ट करने के खिलाफ आंदोलन कर रहे नितिन कार्की ने कहा कि पहाड़ की कल्पना पहाड़ के लिए की थी लेकिन सरकारों को बदनाम करने कुछ लोग शामिल हैं तांकि उनको पहाड़ विरोधी बताया जा सके।