13 जिलों के डीएम से नाराज हैं हाई कोर्ट….हल्द्वानी नगर आयुक्त के तो चल रहे हैं दिन खराब कोर्ट ने अवमानना नोटिस के साथ पेश होने का दिया आदेश….सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणी कागजों पर सरकारी योजना ठीक…नैनीताल में तो मैंने मॉर्निंग वॉक में देखा है चारों ओर नालों और जंगल मे कचरा और प्लास्टिक

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नैनीताल – राज्य में प्लास्टिक बैन पर 13 जिलों के डीएम की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट नाराज है। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस कोर्ट ने सभी डीएम द्वारा रिपोर्ट फाइल नहीं करने पर नाराजगी व्यक्त की है और हल्द्वानी में कूड़ा फैलने पर नगर आयुक्त को अवमानना को नोटिस भी थमाया है। कोर्ट ने नगर आयुक्त से पूछा है कि क्यों ना आप पर अवमानना की कार्रवाई की जाए कोर्ट ने नगर आयुक्त को 28 जुलाई को कोर्ट में व्यक्तिगर रुप से पेश होने को कहा है। कोर्ट ने हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान प्लास्टिक के उपयोग पर भी सरकार से रिपोर्ट मांगी है कोर्ट ने पूछा है कि कूड़ा हटाने की क्या प्लानिंग है और क्या कार्य किया गया है वहीं हिमालय की चोटियों पर कूड़ा निस्तारण के लिये सरकार से क्या पाँलिसी के बारे में पूछा है कोर्ट ने कहा कि कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड़ को कहा है कि जिन चोटियों को पर्यटकों के लिये खोला जा रहा है उसका पर्यावरणीय आँडिट करें और रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें तब सरकार इस पर अनुमति नहीं जारी करेगी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी दावे कागजों पर है ना कि जमीन मै खुद नैनीताल घूम रहा है लेकिन कई नालों और जंगलों में प्लास्टिक के साथ कूडा फैला है। आपको बतादें कि हाईकोर्ट ने राज्य में प्लास्टिक बैन को लेकर 7 जुलाई को आदेश दिया था कोर्ट ने अपने आदेश में प्लास्टिग को बैन करने के साथ जो कम्पनियां प्लास्टिक दे रही हैं उनको राज्य के प्रदूषण बोर्ड़ मे पंजिकरण अनिवार्य कर दिया था और अगर पंजिकरण नहीं करेंगे तो उनके उत्पादों को राज्य में बैन करने को कहा था। कोर्ट ने इस पर रिपोर्ट सभी डीएम से मांगी थी लेकिन आज तक कोई रिपोर्ट फाइल नहीं हो सकी है।
आपकों बता दे कि अल्मोड़ा हवलबाग निवासी जितेंद्र यादव ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार ने 2013 में बने प्लास्टिक यूज व उसके निस्तारण करने के लिए नियमावली बनाई गई थी। परन्तु इन नियमों का पालन नही किया जा रहा है। 2018 में केंद्र सरकार ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स बनाए गए थे जिसमे उत्पादकर्ता, परिवहनकर्ता व बिक्रेताओ को जिम्मेदारी दी थी कि वे जितना प्लास्टिक निर्मित माल बेचेंगे उतना ही खाली प्लास्टिक को वापस ले जाएंगे। अगर नही ले जाते है तो सम्बंधित नगर निगम , नगर पालिका व अन्य फण्ड देंगे जिससे कि वे इसका निस्तारण कर सकें। परन्तु उत्तराखंड में इसका उल्लंघन किया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक के ढेर लगे हुए है और इसका निस्तारण भी नही किया जा रहा है।