नैनीताल टूटेगा मेट्रोपोल का अतिक्रमण….हाई कोर्ट से अवैध अतिक्रमणकारियों को नहीं राहत…डीएम को नोटिस देकर कार्रवाई की मिली छूट….अतिक्रमणकारी कैसे कोर्ट आ सकता है-HC

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नैनीताल – नैनीताल में शत्रु संपत्ति पर विशेष समुदाय के कब्जे के मामले में अतिक्रमणकारियों को कोई राहत हाई कोर्ट से नहीं मिली है। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा है कि नोटिस देकर ही कार्रवाई अमल में लगयीं जाए। हालांकि इस दौरान कोर्ट ने पूछा है कि कैसे अतिक्रमणकारी कोर्ट आ सकता है जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील में कहा कि अगर वो अतिक्रमणकारी भी है तो कानून का पालन करना होगा। आपको बतादें कि पिछले दिनों हाईकोर्ट वकील नितिन कार्की ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि शत्रु संपत्ति जो भारत सरकार के अधीन नैनीताल में जमीन है उसमें बाहरी लोगों द्वारा कब्जा किया गया है इस जमीन पर स्वार मुरादाबाद टांड़ा समेत अन्य लोगों ने जमीन कब्जा ली है तो रोहिंग्या और बंग्लादेशी भी यहां होने की संभावनाएं हैं। इस पत्र का संज्ञान लेते हुए नैनीताल जिला प्रशासन ने इस जमीन का सर्वे किया और 128 लोगों को चिन्हित कर दस्तावेज के साथ पेश होने को कहा है। इसी बीच अतिक्रमणकारियों की ओर से मोहम्मद फारुख ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि वो सालों से रह रहे हैं और उनको रोहिंग्या और बंग्लादेशी कहकर प्रताडित किया जा रहा है अगर कोई कार्रवाई अतिक्रमण पर हो तो उसमें कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाया। हाई कोर्ट के वकील कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा कि इस बिना नोटिस के कार्रवाई नहीं कि जा सकती है।

शहर के बीच इतनी है जमीन..

दरअसल शहर के बीच मेट्रोपोल शत्रु सम्पत्ति है। केन्द्र सरकार के अधीन ये जमीन 11 हजार 385 वर्गमीटर में निर्माण है तो 22 हजार 489 वर्ग मीटर जमीन खाली पड़ी थी..करीब 90 करोड़ से ज्यादा की इस सम्पत्ति को राजा मोहम्मद अमीर अहमद खान निवासी महमूदाबाद जिला सीतापुर की यह संपत्ति 1965 में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रकाशित गजट के आधार पर शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया जिसके बाद से ही ये जमीन सरकार के अधीन है। हांलाकि अब मामला उजागर हुआ है तो डीएम नैनीताल कार्रवाई की बात कर रहे हैं। नैनीताल डीएम ने कहा कि मामला गम्भीर हैं और मैट्रोपोल में शत्रु सम्पत्ति पर किसी ने भी कब्जा किया होगा तो जांच कर उसको हटाया जायेगा।

ये होती है शत्रु सम्पत्ति की जमीन…

दरअसल 1947 में देश के बंटवारे के साथ 1962 में चीन, 1965 और 1971 पाकिस्तान के खिलाफ हुई जंग हुई उस दौरान या उसके बाद भारत छोड़कर पाकिस्तान या चीन चले गए नागरिकों को भारत सरकार शत्रु मानती है। ऐसी संपत्तियों की देखरेख के लिए सरकार एक कस्टोडियन की नियुक्ति करती है। भारत सरकार ने 1968 में शत्रु संपत्ति अधिनियम लागू किया था। जिसके तहत शत्रु संपत्ति को कस्टोडियन में रखने की सुविधा प्रदान की गई। केंद्र सरकार ने इसके लिए कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी विभाग का गठन किया है। जिसे शत्रु संपत्तियों को अधिग्रहित करने का अधिकार है।