आखिर राज्य में किसने कर दिया सरकारी स्कूल के बच्चों का संवैधानिक अधिकारों का हनन..हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लेना पड़ा संज्ञान..धानाचुली की हंसा लोधियाल की याचिका पर पूरे राज्य के स्कूलों पर मांगी अब रिपोर्ट..

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नैनीताल – राज्य में सरकारी शिक्षा के भले ही दावे किये जाएं लेकिन स्कूलों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है..हालात ये हैं कि स्कूलों में ना शौचालय हैं और ना ही पीने का पानी..बच्चों के अधिकारों से हो रहे हनन पर अब उत्तराखण्ड के हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है..कोर्ट ने नोटिस जारी कर बकायदा सरकार और सचिव शिक्षा से रिपोर्ट तलब की है।
दरअसल राज्य की हाईकोर्ट ने आज पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए पूछा है कि क्या सरकार ने किया है और स्कूलों के हालात क्या हैं क्या इन स्कूलों में शौचालय की स्थिति है और पानी की सुविधाएं बच्चों को मिल रही हैं कि नहीं कोर्ट ने ये भी पूछा है कि इन स्कूलों में अभिभावक संघ का गठन किया गया है कि नहीं और सरकार क्या बजट इनके लिये देती है। चीफ जस्टिस कोर्ट ने पूरे मामले पर सरकार सचिव उच्च शिक्षा और सचिव विघालयी शिक्षा को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की है कि ये सुविधाएं स्कूली बच्चों के अधिकार हैं और उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है..
दरअसल कोर्ट ने इस याचिका का संज्ञान घानाचुली की सरपंच हंसा लोधियाल के पत्र पर लिया है। इसमें कहा गया है कि इंटर कालेज 6 से 12वीं तक है..और पूरे इलाके का ये स्कूल है पत्र में कहा गया है कि 450 बच्चे पढते हैं लेकिन सुविधाओं का स्कूल में टोटा है कोर्ट ने इस याचिका का संज्ञान लेते हुए पूरे राज्य की शिक्षा को लेकर अब संज्ञान लिया है।