आस्था…यहां हो रहे हैं मिनी बंगाल के दर्शन…..धनुची पूजा ढाँकर की आवाज और भक्तों की भीड़….देश भर से भी भक्तों का उमड़ा रैला

70

नैनीताल – नैनीताल भले ही देश भर के पर्यटकों की पसंद रहा हो लेकिन इन दिनों सरोवर नगरी की फिजा मिनी बंगाल के रुप में देखने को मिल रही है। आम तौर पर कोलकत्ता में होने वाली दुर्गा पूजा की नैनीताल में धूम है।

दुर्गा पंड़ाल में उमड़ रही है भीड़

नैनीताल में सजे ये दुर्गा पंड़ाल लोगों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। सुबह से माँ दुर्गा के दर्शन के लिये पंड़ाल में भीड़ आ रही है तो माँ के जयकारों और घंटियों की गूंज दुर्गा के प्रति आस्था को और गहरा कर रही हैं। दिन भर के बाद शाम होते ही नयना देवी में धनुच्ची पूजा के लिये लोगों का जमावड़ा लग रहा है। कपूर,नारियल की जटाओं से होने वाली धनुची पूजा के दौरान मां दुर्गा की स्तुति भी कर रहे हैं तो दुर्गा के 1 हजार कमलों से होने वाली पूजा भी सैलानीयों और स्थानीय लोगो को अपनी ओर खींच ला रही है और बंगाल में होने का अहसास दे रही हैं। बंगाल से आई युवती श्रीजीता ने कहा कि उसको लग रहा था की पहली बार उनकी पूजा छूट जायेगी लेकिन नैनीताल में वैसी ही पूजा हो रही है जिससे उनको घर में रहने जैसा आभास हो रहा है। वहीं पर्यटक रिया ने कहा कि ये हमारी आस्था के साथ इससे हमारा जुड़ाव बचपन से है और लोग इसके लिये साल भर इंतजार करते हैं ढांकर की आवाज और धनुची पूजा का आनंद लग रहा है किसी बंगाल के पंड़ाल में हैं।

बंगाली पहाड़ी कर रहे हैं आयोजन…

गौरतलब है कि दुर्गापूजा बंगाली लोगों की जरुर है लेकिन नैनीताल में पहाड़ी और बंगाली 66 सालों से इसका मिलकर आयोजन कर रहे हैं। पूजा के दौरान धनुच्ची पूजा इसका आकृर्षण रहता है तो बंगाल से नैनीताल पहुंचे लोग भी दुर्गा पंड़ाल में आकर खुद को घर का अहसास करते हैं और पूरा पंड़ाल मिनी बंगाल के तौर पर दिखने लगता है। हांलाकि पूजारी तपन चटर्जी कहते हैं राम चन्द्र जी ने आकाल बदन पूजन किया था 108 कमलों के साथ उसमें दुर्गा माई ने एक छिपाकर रख दिया उनकी भाव देखकर वो कमल भी मिल गया है। जब माँ की पूजा राम ने की तब रावण का बध किया गया दुर्गा माँ नही होती तो रावण का बध मुश्किल होता..