जनता कहिंन… लाऊड स्पीकर की आवाज़ कम पर महंगाई व बेरोजगारी हो रही लाऊड

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star khabarनैनीताल- आजकल धर्म स्थानों में लाऊड स्पीकर मामला देश में बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है।उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड से लेकर राष्ट्र की राजधानी में केवल यही मुद्दा ज्यादा गरम है।कुछ राजनेता इसका सीधा दोष काँग्रेस के माथे मढ़ते हैं।जे.डी.यू नेता माधव आनंद का कहना है कि धर्म विशेष के लिए ऐसी राजनीति को बढ़ावा देने का काम काँग्रेस ने ही किया है।सचमुच वर्तमान दौर में कृत्रिम मुद्दों को हवा देने की सत्तासीनों की कार्ययोजना पूरी तरह से फ़लीभूत होती दिखाई देती है।देश में मजबूत विपक्ष न होने के चलते आमजन के मुद्दे लगभग गायब से हो गए हैं।महंगाई व बेरोजगारी का बोलबाला है पर इन मुद्दों पर सत्तासीन पूरी तरह से खामोश हैं।लगता है कि भारत में रामराज्य आ चुका है।अब धर्म स्थलों से लाऊड स्पीकर हटा कर या उसकी आवाज़ कम करके ही सुशासन लाना तय होगा। लाऊड स्पीकर की आवाज़ नियंत्रित होनी ही चाहिए इसमें कोई शक नही पर पिछले बरसों में दिल्ली की केंद्रीय सत्ता सहित उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड व अनेक राज्यों में भाजपा ही सत्तासीन है।लेकिन कुछ मुद्दे विशेष के अतिरिक्त्त सत्तासीनों के पास कोई ठोस मुद्दे प्रतीत नही होते दिख रहे हैं।कभी तीन तलाक़ तो कभी हिज़ाब तो कभी खुले में नमाज़ और अब मस्जिदों में लाऊड स्पीकर मामला बनाया गया है।

 

मेरा भी रहा है ये अनुभव

मैं आपको मेरा निजी अनुभव बताता हूँ।मेरा घर तो मंदिर व गुरुद्वारे के बीच है तो बचपन से ही सुबह अध्ययन के समय एक तरफ से गुरुवाणी तो दूसरी तरफ से पंडित जी के श्लोक ही सुनाई देते थे।जब आवाज़ कम करने के लिए इन संस्थानों से कहा जाता था तो इनका कहना था कि अच्छी बातें भी सुना करो।पर दोनों में से किसी ने भी इस धार्मिक शोर को कम नही किया।मैं व्यक्तिगत रूप से किसी समुदाय का विरोधी नही हूँ पर सरकारों को किसी एक धर्म व समुदाय को टारगेट नही करना चाहिए..उन्हें सदैव सर्वहित में काम करना चाहिए..उत्तरप्रदेश के ए.डी.जी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि अब तक लगभग 22000 धार्मिक संस्थानों से लाऊड स्पीकर उतार लिए गए हैं।और लगभग 42 हज़ार संस्थानों में आवाज़ को कम किया गया है..

कुल मिलाकर सरकारों का काम आमजन को बढ़ती महंगाई से राहत व रोजगार के साधन उपलब्ध कराना होता है।पर अब तो राजनीति की गंगा ही उल्टी बहने लगी है। अगर सत्तासीन जनहित के सही फैसले नही ले पाते हैं तो मामलों को किसी समुदाय विशेष की तरफ या उसका दोष विपक्षी दलों की ओर मोड़ देते हैं।जबकि देश व अनेक राज्यों में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकारें है।इसलिए आमजन को समझना होगा कि सवाल उसी से होगा जो सत्ता में विराजमान होगा। सत्तासीनों को संबंध में देशहित में कानून बनाने होंगे और देशहित में ही उनका क्रियान्वयन भी करना होगा। यहाँ सवाल यह उठता है कि क्या सत्तासीन संदर्भ में कानून बनाना नही चाहते..? उन्हें लगता है कि जब हवा हवाई मामलों पर देश की जनता सर आँखों पर ले रही है तो केवल मामलों में प्रचारतंत्र को ही मजबूत किया जाए.. देश की उन्नति में एक वर्ग विशेष बाधक है।या देश का अमुक राजनीतिक दल ने बड़ा नुकसान किया केवल यह प्रचारित करके ही शासन पैटर्न बनाना सर्वदा अनुचित ही कहा जायेगा।सत्तासीनों को यह समझना होगा कि राज भी करो और दोष केवल पिछले नेताओं के माथे मढ दो..इससे भविष्य में आमजन से उनका विश्वास ही टूटेगा..स्वच्छ राजनीति के लिए देश का विकास,महंगाई नियंत्रण व रोजगार सुनिश्चित करना ही होगा तभी राष्ट्र उन्नति के पथ पर आगे बढ़ सकेगा..एक समृद्धशाली राष्ट्र की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है जब सरकारों द्वारा सभी धर्म,संप्रदायों को साथ लेकर चला जाये व महंगाई और बेरोजगारी पर भरपूर फ़ोकस रखा जाए..केवल एक वर्ग विशेष पर दोषारोपण करके सरकारें अपने दायित्व से बच नही सकती…