नैनीताल। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में 20 से 30 अप्रैल के बीच एरीज ट्रेनिंग स्कूल इन ऑब्जर्वेशनल एस्ट्रोनॉमी एंड एटमॉस्फेरिक साइंसेज का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर के युवा छात्रों को आधुनिक खगोल विज्ञान, प्रेक्षणीय तकनीकों तथा वायुमंडलीय विज्ञान के व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से चयनित 33 छात्रों ने भाग लिया। दस दिवसीय इस विशेष प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को खगोलीय एवं वायुमंडलीय अवलोकनों, डेटा विश्लेषण, दूरबीनों और रडार तकनीकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।
एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा आयोजित व्याख्यानों में तारों, आकाशगंगाओं, समय-आधारित खगोलीय घटनाओं, वायु प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष फोकस किया गया। छात्रों को वास्तविक वैज्ञानिक डेटा के प्रसंस्करण, इमेजिंग तकनीकों और आधुनिक सॉफ्टवेयर टूल्स के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की विशेषता रही कि इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण तकनीकों की भी जानकारी साझा की गई, जिससे छात्रों को भविष्य की वैज्ञानिक शोध पद्धतियों से परिचित कराया जा सका।
एरीज के निदेशक डॉ. मनीष कुमार नजा ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें विज्ञान के व्यावहारिक पहलुओं से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि एरीज का वार्षिक एरीज ट्रेनिंग स्कूल इन ऑब्जर्वेशनल एस्ट्रोनॉमी एंड एटमॉस्फेरिक साइंसेज कार्यक्रम भविष्य के वैज्ञानिकों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह आयोजन न केवल छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक साबित हुआ, बल्कि विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी रुचि को नई दिशा देने वाला भी सिद्ध हुआ।
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