बुग्यालों-ग्लेशियरों में प्लास्टिक कचरे पर हाईकोर्ट गंभीर, मुख्य सचिव को प्रत्यावेदन देने के निर्देश… रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर ” नैनीताल

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के धार्मिक स्थलों, बुग्यालों और ग्लेशियरों में सिंगल यूज प्लास्टिक से बढ़ते प्रदूषण के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को अपनी सभी मांगों का विस्तृत प्रत्यावेदन मुख्य सचिव को सौंपने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि मुख्य सचिव प्रत्यावेदन पर विचार कर सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी रोक, जागरूकता अभियान चलाने तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही इस जनहित याचिका को इसी विषय से संबंधित एक अन्य याचिका के साथ क्लब कर दिया गया है।समाजसेवी एवं आयुर्वेद विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. आशुतोष पंत की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों, बुग्यालों और ग्लेशियरों में जाने वाले श्रद्धालु, पर्यटक और पर्वतारोही अपने साथ प्लास्टिक की पानी की बोतलें, खाद्य सामग्री के पैकेट तथा अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पाद ले जाते हैं, जिन्हें वापस नहीं लाया जाता। इससे जंगलों, ग्लेशियरों, नदियों और प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक कचरा लगातार बढ़ रहा है, जो पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
याचिका में मांग की गई है कि धार्मिक स्थलों और बुग्यालों में जाने वाले यात्रियों व ट्रैकर्स की निगरानी के लिए अधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, जो यह सुनिश्चित करें कि पर्यटक अपने साथ ले गए प्लास्टिक पैकेट, बोतलें और अन्य कचरा वापस लेकर आएं।
इसके अलावा भंडारों, शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में प्लास्टिक के गिलास, प्लेट, बोतलों व अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री के बड़े पैमाने पर उपयोग पर भी चिंता जताई गई है। याचिका में मांग की गई है कि ऐसे आयोजनों के लिए आयोजकों से बांड भरवाया जाए, जिसमें कार्यक्रम समाप्त होने के बाद स्थल की साफ-सफाई की जिम्मेदारी तय हो। शर्तों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाए और उससे प्राप्त राशि का उपयोग कचरा हटाने के कार्य में किया जाए।