298 करोड़ से बलियानाला का उपचार, फिर भी दरक रहा पहाड़… आलूखेत में भूस्खलन ने बढ़ाई चिंता… रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल। पहाड़ों को थामने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन नैनीताल में भूस्खलन की चुनौती कम होने का नाम नहीं ले रही। बलियानाला में करीब 298 करोड़ रुपये की लागत से उपचार कार्य चल रहा है, वहीं लगातार बारिश के बीच आलूखेत में पहाड़ दरकने से एक बार फिर शहर की संवेदनशील पहाड़ियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आलूखेत क्षेत्र में बारिश के दौरान पहाड़ी खिसकने की घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश से पहाड़ी ढलानों में पानी का दबाव बढ़ने के कारण भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में आलूखेत की घटना को आने वाले दिनों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
नैनीताल का बलियानाला लंबे समय से भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहा है। इसके स्थायी उपचार के लिए पहले करीब 177.91 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत हुई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 298.93 करोड़ रुपये किया गया। यहां माइक्रोपाइलिंग, ग्राउटिंग और शॉटक्रेटिंग जैसी तकनीकों से पहाड़ को स्थिर करने का काम किया जा रहा है। सिंचाई विभाग के अनुसार परियोजना का करीब 92 प्रतिशत काम जुलाई तक पूरा हो चुका था और शेष कार्य जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
आलूखेत में भूस्खलन ने स्पष्ट कर दिया है कि नैनीताल की पहाड़ियों की समस्या किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है। नैना पीक, टिफिन टॉप, कैलाखान, राजभवन मार्ग, चार्टन लॉज और आलूखेत जैसे क्षेत्र भी समय-समय पर भूस्खलन की चपेट में आते रहे हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बलियानाला में बड़े पैमाने पर उपचार के साथ शहर के दूसरे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केवल भूस्खलन के बाद राहत कार्य पर्याप्त नहीं है। संवेदनशील ढलानों का वैज्ञानिक सर्वे, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और समय रहते स्थायी उपचार जरूरी है।
आलूखेत में पहाड़ खिसकने की ताजा घटना ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। करोड़ों रुपये के उपचार के बावजूद यदि आसपास के क्षेत्र लगातार दरकते रहे तो नैनीताल की पहाड़ियों की समग्र सुरक्षा को लेकर नए सिरे से कार्ययोजना बनाने की जरूरत होगी।