पहले चेताया, नहीं चेता प्रशासन…दो मौतों के बाद अब घर-घर जांच… दो मौतों के बाद टूटी प्रशासन की नींद, ज्योलीकोट में अब घर-घर होगी जांच.. रिपोर्ट- (सुनील भारती) “स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल। ज्योलीकोट क्षेत्र में पिछले कई दिनों से उल्टी-दस्त, टायफाइड और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों के फैलने और दो लोगों की मौत के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी। सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अरविन्द कुमार पाण्डे ने ज्योलीकोट, गाजा, सरियाताल, छीड़ा और आसपास के गांवों का स्थलीय निरीक्षण कर स्वास्थ्य एवं पेयजल व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

इस दौरान उन्होंने अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात कर उनका हाल जाना।
क्षेत्र में बीमारी फैलने के बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि दूषित पानी की समस्या को लेकर पहले भी संबंधित विभागों को जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब दो मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय नजर आ रहा है।

सीडीओ ने स्वास्थ्य विभाग को क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों की जांच करने तथा ब्लड और वायरस सैंपल लेने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य शिविर लगाने के साथ ही ग्रामीणों को बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक करने को कहा गया है। मेडिकल टीम एंबुलेंस के साथ क्षेत्र में मौजूद रहकर मरीजों की निगरानी करेगी। बीमार लोगों के घर जाकर उनकी नियमित देखरेख और दवा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गंभीर मरीजों को तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने को कहा गया है, ताकि उपचार में किसी तरह की देरी न हो।
निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने बीरभट्टी में सीवरेज लाइन के चैंबर से हो रहे लीकेज का भी जायजा लिया। दूषित पानी के पेयजल स्रोतों तक पहुंचने की आशंका को देखते हुए उन्होंने जल संस्थान के अधिकारियों को लीकेज की मरम्मत और लाइन शिफ्टिंग का कार्य तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए।

अब जल संस्थान और पेयजल निगम को सभी जल स्रोतों से नियमित सैंपल लेने, क्लोरीनेशन कराने और पानी की गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीडीओ ने पिछले तीन माह के दौरान पेयजल टैंकों, जल स्रोतों और घरों से लिए गए पानी के सभी नमूनों की जांच रिपोर्ट भी तलब की है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्रोत से लेकर अंतिम घर तक पानी की गुणवत्ता की जांच की जाए।

जिस जल स्रोत का नमूना दूषित पाया जाएगा, उसे तहसीलदार के माध्यम से सील कराया जाएगा। खराब जल स्रोतों की सीलिंग की जिम्मेदारी तहसीलदार को दी गई है।

●सवाल यह कि पहले क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

ज्योलीकोट क्षेत्र में बीमारी का प्रकोप अचानक सामने नहीं आया। ग्रामीण लंबे समय से पेयजल की गुणवत्ता और सीवरेज रिसाव को लेकर चिंता जता रहे थे। इसके बावजूद समय रहते व्यापक स्तर पर जांच, जल स्रोतों की निगरानी और दूषित पानी की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
अब दो मौतों के बाद अधिकारियों की दौड़ शुरू हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि समय रहते जल स्रोतों और सीवर लाइन की जांच कर ली जाती तो क्या हालात यहां तक पहुंचते?
सीडीओ अरविन्द कुमार पाण्डे ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। जांच में जिस भी स्तर पर लापरवाही सामने आएगी, संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना जल संस्थान की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सीडीओ ने मुख्य चिकित्साधिकारी को क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को आयुष्मान योजना के तहत अनुबंधित अस्पतालों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। संबंधित अस्पतालों को योजना के पात्र मरीजों का तत्काल निश्शुल्क उपचार सुनिश्चित करने को कहा गया है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला प्रशासन को सूचना दें, ताकि समय रहते उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
निरीक्षण के दौरान क्षेत्र प्रमुख भीमताल डॉ. हरीश बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य हिमांशु पाण्डे, ग्राम प्रधान बेलवाखान डॉ. बबीता मनराल, सीएमओ डॉ. रश्मि पंत, परियोजना निदेशक शिल्पी पंत, जिला विकास अधिकारी संतोष कुमार पंत, अधीक्षण अभियंता पेयजल निगम अशोक कटारिया, एपीडी चंद्रा फर्त्याल, अधिशासी अभियंता जल संस्थान मनीष पिल्लई, तहसीलदार अक्षय भट्ट, चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमंत मर्तोलिया समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।