खेल मैदानों में नहीं होंगे गैर-खेल आयोजन, हाई कोर्ट ने सरकार को दिए अहम निर्देश… तीन माह में प्लेग्राउंड, ओपन स्पेस व पार्कों को नोटिफाई कर नीति बनाने के निर्देश… रिपोर्ट- (ब्यूरो) “स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्रदेश के खेल मैदानों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सचिव शहरी विकास को निर्देश दिए हैं कि तीन माह के भीतर प्रदेश के प्लेग्राउंड, ओपन स्पेस और पार्कों को चिह्नित कर नोटिफाई किया जाए। साथ ही इनके उपयोग को लेकर स्पष्ट नीति तैयार की जाए। कोर्ट ने खेल मैदानों में व्यावसायिक गतिविधियों समेत खेल से इतर आयोजनों पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खेल मैदानों के संबंध में लागू 1975 के अधिनियम का प्रभावी रूप से पालन कराया जाए। न्यायालय ने कहा कि खेल मैदानों का मूल उद्देश्य खिलाड़ियों को खेल की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे स्थानों का उपयोग व्यावसायिक या अन्य गतिविधियों के लिए किए जाने से खिलाड़ियों के हित प्रभावित होते हैं।
मामला रामनगर के एमपी इंटर कालेज के खेल मैदान से जुड़ा है। रामनगर निवासी एवं नेशनल खिलाड़ी शालाबुल हक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि खेल मैदान में समय-समय पर व्यावसायिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इससे खिलाड़ियों को अभ्यास और खेल गतिविधियों के लिए मैदान उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
याचिका में मैदान में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ ही कथित अतिक्रमण हटाने की मांग भी की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खेल मैदानों के व्यापक संरक्षण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को प्रदेशभर के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।

●नोटिफिकेशन होने तक मैदान का इस्तेमाल खेल के लिए ही..

कोर्ट ने कहा कि जब तक संबंधित खेल मैदान, ओपन स्पेस और पार्कों को विधिवत नोटिफाई नहीं किया जाता, तब तक रामनगर के एमपी इंटर कालेज मैदान का उपयोग खेल गतिविधियों के लिए ही किया जाए। साथ ही संबंधित अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाई कोर्ट के इस आदेश को प्रदेश में खेल मैदानों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आदेश के बाद खेल मैदानों में खेल गतिविधियों के अलावा अन्य आयोजन कराने पर संबंधित जिम्मेदारों के लिए कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। न्यायालय के आदेश की अवहेलना की स्थिति में अवमानना की कार्यवाही भी हो सकती है।