★. एक करोड़ 77 लाख खर्च, फिर भी सूखे नल, विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों पर मिलीभगत का आरोप
★. हर घर जल योजना में भारी घोटाले का आरोप, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
(चन्दन सिंह बिष्ट) “स्टार खबर”
लोहाघाट। ग्रामीण क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर जल, नल योजना चंपावत जनपद में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। बांस-बसवाड़ी, धिंघारुकोट, जमानटा, सांगों और बसान गांवों में योजना पर लगभग एक करोड़ 77 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी धन की खुली बंदरबांट की गई। कई स्थानों पर योजनाओं को कागजों में पूरा दिखाकर मौके पर अधूरा छोड़ दिया गया। कहीं सूखे टैंक खड़े कर दिए गए, तो कहीं टैंक नीचे और गांव ऊपर बना दिए गए, जिससे पानी गांवों तक पहुँच ही नहीं पा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी अनियमितताओं की शिकायतें कई बार संबंधित अधिकारियों से की गईं, लेकिन जांच या सुधार के बजाय ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया। आपदा के बाद जिन मरम्मत कार्यों को एक वर्ष पूर्व पूरा किया जाना था, वे आज तक शुरू नहीं हो सके हैं।
स्थानीय समाजसेवी सुरेश जोशी और नंदू पाण्डेय ने निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री के प्रयोग का आरोप लगाया है। कई जगह पाइपलाइनें खुले में लटकती छोड़ी गई हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घटिया गुणवत्ता का नतीजा यह है कि पानी के टैंक एक वर्ष भी नहीं टिक पाए और उनमें लीकेज शुरू हो चुका है।
इन खामियों का सीधा खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें आज भी पानी से वंचित रहना पड़ रहा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने अब जिलाधिकारी से मुलाकात कर उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया है।







