हिंदी रंगमंच दिवस पर नैनीताल में ‘अंतिम युद्ध’ नाटक का पाठ, रंगकर्मियों ने रखे विचार.. रिपोर्ट- (सुनील भारती) “स्टार खबर ” नैनीताल..

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हिंदी रंगमंच दिवस पर नैनीताल में ‘अंतिम युद्ध’ नाटक का पाठ, रंगकर्मियों ने रखे विचार..

रिपोर्ट- (सुनील भारती) “स्टार खबर ” नैनीताल..

नैनीताल।
हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर नैनीताल में रंगकर्मियों द्वारा शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ रंगकर्मी एच०एस० राणा “बाबा” द्वारा लिखित नए नाटक “अंतिम युद्ध” का पाठ किया गया। यह कार्यक्रम ‘प्रयोगांक नैनीताल’ के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें शहर के कला प्रेमियों और रंगमंच से जुड़े लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।नाटक “अंतिम युद्ध” युद्ध की कुरूपता और उसके विभत्स स्वरूप को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। यह नाटक राणा द्वारा सन् 1978 में लिखे गए चर्चित नाटक “चौराहे का मसीहा” का विस्तारित रूप है, जिसका मंचन उस समय अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिता, नैनीताल में किया गया था। उस प्रस्तुति में अन्य कलाकारों के साथ भारतीय सिनेमा के अभिनेता स्वर्गीय निर्मल पांडे तथा उनके बड़े भाई मिथिलेश पांडे ने भी अभिनय किया था।नाटककार ने इस नए संस्करण में वर्तमान तकनीक और सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कथानक को आगे बढ़ाया है। इसमें सत्ता के प्रति शासकों की लोलुपता और निर्दोष जनता के संहार से उपजे दर्द को गहराई से उकेरा गया है। वर्तमान समय की परिस्थितियों में यह नाटक पूरी तरह समसामयिक प्रतीत होता है।कार्यक्रम के दौरान मिथिलेश पांडे, एच०एस० राणा, डी०के० शर्मा, मुकेश धस्माना, मनोज साह, मदन मेहरा, राजेश आर्या और उमेश कांडपाल सहित अन्य रंगकर्मियों ने अपने विचार व्यक्त किए और हिंदी रंगमंच की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।गौरतलब है कि हिंदी रंगमंच दिवस प्रतिवर्ष 3 अप्रैल को मनाया जाता है। यह दिन 1868 में वाराणसी में शीतला प्रसाद त्रिपाठी द्वारा लिखित पहले हिंदी नाटक ‘जानकी मंगल’ के मंचन की स्मृति में समर्पित है। यह अवसर हिंदी रंगमंच की समृद्ध परंपरा, भारतेंदु हरिश्चंद्र के योगदान और अभिनय कला के विकास का उत्सव भी है।इस अवसर पर भारतेंदु हरिश्चंद्र, मोहन राकेश, जयशंकर प्रसाद, धर्मवीर भारती, रामधारी सिंह दिनकर, प्रेमचंद, बृजमोहन साह, गोविंद बल्लभ पंत, हरिशंकर परसाई, मैथिलीशरण गुप्त, भगवतीचरण वर्मा, भीष्म साहनी सहित अनेक साहित्यकारों की रचनाओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन मिथिलेश पांडे द्वारा किया गया।