आपदा पीड़ित अब भी टेंट में रहने को मजबूर, 4 साल बाद भी नहीं मिला पूर्ण मुआवजा—विस्थापन की मांग तेज.. रिपोर्ट- (सुनील भारती) “स्टार खबर” नैनीताल..

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मुनस्यारी/पिथौरागढ़।
आपदा प्रभावित परिवारों की समस्याएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। साल बीत जाने के बावजूद बोना, गोल्फा, झापुली सहित कई गांवों के प्रभावित परिवार आज भी टेंट स्कूलों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शीघ्र विस्थापन की मांग उठाई है।
बताया गया कि मालुपाती और धापा गांव के प्रभावित परिवारों को दूसरी किस्त का धन आवंटन किए हुए करीब चार साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा धापा, मालुपाती, सुरिघाट, जिमिघाट, कुलथम, बोना, गोल्फा, भदेली, सेरासुराईधार और रीठा के कई परिवार अब भी विस्थापन से वंचित हैं।
इन सभी मांगों को लेकर प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों ने तहसील मुख्यालय में प्रदर्शन किया। इस दौरान तहसीलदार के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि दो सप्ताह के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो सभी आपदा प्रभावित परिवार तहसील मुख्यालय मुनस्यारी और जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ में विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि मदकोट मुनस्यारी एवं यूथ कांग्रेस जिला अध्यक्ष विक्रम दानू ने कहा कि प्रभावित परिवार लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं और अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है।इस दौरान लक्ष्मण विश्वकर्मा, किशोर प्रहलाद, नरेंद्र, खज्जू, हरीश, उदय, रमेश, लक्ष्मण विश्वकर्मा, किशोर सिंह, हरीश सिंह, महेंद्र सिंह, सोनू खत्री, हीरा सिंह खत्री, लक्ष्मी, देवी, हिरुली देवी, गीता देवी,तनुजा देवी,पूजा देवी, रमेश, सुरेश सिंह, सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।