ननैनीताल।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.) ने शनिवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीबीएस परिसर में कुलपति एवं संकायाध्यक्षों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, नवाचार और विद्यार्थियों के कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा देने वाली संस्थाएं नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थी विश्वविद्यालयों की मुख्धुरी हैं और शिक्षकों की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के लिए तैयार करने की भी है।
उन्होंने शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार समर्पित शिक्षक होते हैं। साथ ही पूर्व विद्यार्थियों (अल्मुनी) को विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए उनके अनुभव और सहयोग को संस्थान के विकास से और मजबूती से जोड़ने की आवश्यकता बताई।बैठक में राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों द्वारा शैक्षणिक सुधार, शोध गतिविधियों, डिजिटल व्यवस्थाओं और आधारभूत संरचना के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के लिए तेजी से कार्य किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम समयानुकूल, रोजगारोन्मुख और व्यावहारिक होने चाहिए, ताकि विद्यार्थी नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान और कौशल विकास में भी दक्ष बन सकें। विश्वविद्यालयों में इंटर्नशिप, स्टार्टअप, प्रयोगात्मक शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।
राज्यपाल ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग की उपलब्धियों और उसके पूर्व नेतृत्व द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। साथ ही रसायन विज्ञान विभाग, नैनीताल झील संरक्षण से जुड़े प्रयासों तथा नौसेना एनसीसी की गतिविधियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने विश्वविद्यालयों की सफलता की प्रेरक कहानियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को युवाओं को राष्ट्रहित, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार से जोड़ते हुए विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
इस अवसर पर कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रावत ने विश्वविद्यालय की तीन वर्षों की उपलब्धियों, शोध गतिविधियों और छात्र हित में किए गए कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि पहली बार आंतरिक शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए शोध अनुदान और पेटेंट फाइलिंग हेतु सहायता प्रदान की गई है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भागीदारी के लिए शिक्षकों और शोधार्थियों को विशेष अनुदान उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने अनाथ विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा देने, स्नातक छात्रों को उसी वर्ष डिग्री उपलब्ध कराने तथा वीसी इंटर्नशिप और लैब/ऑफिस इंटर्न कार्यक्रम शुरू करने जैसी महत्वपूर्ण पहल की है।
बैठक में हर्बल टी पर शोध, तितली की नई प्रजाति की पहचान और पटवाडांगर परिसर स्थित पटवा गार्डन में पटवा वृक्ष के पुनर्जीवन को भी विश्वविद्यालय की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया गया।
बैठक में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक, अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।







