नैनीताल। रंगमंच और कला के क्षेत्र में पांच दशक का सफर पूरा कर चुका युगमंच अपने स्वर्ण जयंती वर्ष 2026-27 के तहत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में दिवंगत अभिनेता एवं रंगकर्मी निर्मल पांडे की 65वीं जयंती को समर्पित दो नाटकों का मंचन 10 और 11 अगस्त को किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन युगमंच एवं प्रयोगांक सोसाइटी फॉर सोशल एंड एनवायरनमेंटल डेवलपमेंट के संयुक्त सहयोग से होगा।आयोजन में प्रसिद्ध नाटककार असगर वजाहत के लिखे ‘ओ जन्मया ही नई’ और ‘अंतिम युद्ध’ का मंचन किया जाएगा। दोनों नाटकों की विषयवस्तु अलग-अलग होने के बावजूद इनके केंद्र में मानवीय संवेदनाएं और इंसान के सामने खड़ी सामाजिक चुनौतियां हैं।
●विभाजन की पीड़ा को सामने लाएगा ‘ओ जन्मया ही नई’..
‘ओ जन्मया ही नई’ में वर्ष 1947 के भारत-पाक विभाजन के दौर में बिछड़ते परिवारों और टूटते रिश्तों के बीच इंसानियत को तलाशने की कोशिश की गई है। नाटक की कहानी उस दौर के आम लोगों की पीड़ा और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की भावनाओं को सामने लाती है। धार्मिक कट्टरता और बदलते सामाजिक हालात के बीच मानवीय रिश्तों की अहमियत को नाटक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
युगमंच इस नाटक का देश के विभिन्न हिस्सों में करीब 50 बार मंचन कर चुका है। इसका पहला मंचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में हुआ था।
नाटक में मिथिलेश पांडे, अदिति खुराना, प्रियांशु आर्या, हर्षिता गुसाईं, भाष्कर बिष्ट, जहूर आलम, मनोज कुमार, पवन कुमार, डीके शर्मा, नवीन बेगाना और नीरज डालाकोटी अभिनय करेंगे।
●‘अंतिम युद्ध’ में इंसान के भीतर की लड़ाई..
दूसरा नाटक ‘अंतिम युद्ध’ भविष्य की भयावह और डिस्टोपियन परिस्थितियों की कल्पना पर आधारित है। तीसरे विश्वयुद्ध के बाद की स्थिति में एक बंकर के भीतर मौजूद चार पात्रों के माध्यम से युद्ध के बाद बची दुनिया और मानव मन की स्थिति को दर्शाया गया है।
नाटक केवल युद्ध की तबाही तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सवाल उठाता है कि परिस्थितियां विपरीत होने पर मनुष्य के भीतर इंसानियत कितनी देर तक जीवित रह सकती है। प्रेम, विवेक, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के बीच चलने वाला संघर्ष इसकी केंद्रीय थीम है।
‘अंतिम युद्ध’ में मदन मेहरा, दीपक सहदेव, राजेश आर्या और योगिता तिवारी अभिनय करेंगे। मंच नियोजन उमेश कांडपाल, संगीत संयोजन मदन मेहरा, पार्श्व ध्वनि उमेश कांडपाल, वेशभूषा एचएस राणा और प्रकाश व्यवस्था योगिता तिवारी संभालेंगे।
●प्रयोगांक का रंगमंच में लंबा सफर..
प्रयोगांक, नैनीताल वर्ष 2001 से रंगमंचीय गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2006 में संस्था का पंजीकरण कराया गया। इसके बाद संस्था ने लगातार रंगमंच और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों को लोगों तक पहुंचाने का काम किया है।
संस्था की ओर से अब तक ‘अंधा युग’, ‘नीति चरित्रम्’, ‘भोलानाथ’ और ‘दुनिया द्विरंगी’ समेत 35 से अधिक नाटकों का मंचन किया जा चुका है। इसके अलावा संस्था द्वारा 10 हजार से अधिक नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुतियां किए जाने का दावा किया गया है।यह संस्करण शब्दशः नकल के बजाय स्वतंत्र समाचार लेखन में तैयार किया गया है।







