नैनीताल। आसमान में टूटते तारों के नाम से मशहूर उल्काएं बुधवार की रात यानी 12-13 अगस्त को लोगों को रोमांचित करने वाली हैं। इस दौरान वर्ष के सबसे लोकप्रिय उल्कापातों में शामिल पर्सीड उल्कापात अपने चरम पर होगा। मौसम साफ रहा तो मध्यरात्रि के बाद आकाश में बड़ी संख्या में उल्काएं चमकती हुई दिखाई दे सकती हैं।
दरअसल, जिसे आम बोलचाल में टूटता तारा या शूटिंग स्टार कहा जाता है, उसका तारों से कोई संबंध नहीं होता। इन्हें वैज्ञानिक रूप से उल्का (Meteor) कहा जाता है। ये धूमकेतुओं अथवा क्षुद्रग्रहों से निकले धूल और छोटे-छोटे कण होते हैं, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय घर्षण के कारण गर्म होकर चमकने लगते हैं। यही चमकती हुई लकीर हमें कुछ क्षणों के लिए आसमान में दिखाई देती है।
धूमकेतु छोड़ता है धूल-कणों का बादल पर्सीड उल्कापात का संबंध स्विफ्ट-टटल धूमकेतु से है। यह धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपनी कक्षा में धूल और छोटे-छोटे कण छोड़ता जाता है। जब पृथ्वी अपनी कक्षा में घूमते हुए इन कणों के बादल से गुजरती है तो ये कण तेज गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और घर्षण के कारण जलकर चमकने लगते हैं। एक ही समय में बड़ी संख्या में ऐसी उल्काएं दिखाई देने पर इसे उल्कापात कहा जाता है।
प्रति घंटे 50 से 100 उल्काएं दिखने की संभावना पर्सीड उल्कापात सामान्यतः जुलाई के मध्य से अगस्त के अंत तक सक्रिय रहता है, लेकिन अगस्त के मध्य में इसकी गतिविधि चरम पर पहुंचती है। वर्ष 2026 में 12-13 अगस्त की रात इसके चरम पर होने की उम्मीद है। इस बार अमावस्या के कारण चंद्रमा का प्रकाश भी बाधा नहीं बनेगा। ऐसे में आसमान साफ रहने पर खगोलीय प्रेमियों को बेहतर नजारा देखने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार अनुकूल परिस्थितियों में मध्यरात्रि के बाद प्रति घंटे करीब 50 से 100 उल्काएं देखी जा सकती हैं।
दूरबीन नहीं, बस साफ और अंधेरा आसमान जरूरी पर्सीड उल्कापात देखने के लिए किसी विशेष उपकरण या दूरबीन की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए शहर की कृत्रिम रोशनी से दूर किसी खुले और अंधेरे स्थान का चयन करना बेहतर रहेगा। आराम से लेटकर खुले आसमान की ओर देखने पर कुछ समय बाद चमकती हुई उल्काएं दिखाई दे सकती हैं।हालांकि अगस्त में मानसून के कारण देश के कई हिस्सों में बादल छाए रहते हैं। ऐसे में यदि मध्यरात्रि के बाद कुछ घंटों के लिए आसमान साफ हो जाए तो पर्सीड उल्कापात का यह अद्भुत ‘आसमानी आतिशबाजी’ का नजारा देखा जा सकता है।







