जलजनित रोगों की रोकथाम को स्वास्थ्य विभाग का अभियान तेज.. 338 लोगों की जांच, 45 ब्लड सैंपल लिए; हरिनगर व सात नंबर में 77 रैपिड टेस्ट, सभी निगेटिव… रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर ” नैनीताल..

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नैनीताल । ज्योलिकोट समेत आसपास के क्षेत्रों में जलजनित रोगों की रोकथाम और प्रभावित लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत के निर्देश पर स्वास्थ्य टीमें शिविर लगाने के साथ ही घर-घर पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं।
अभियान के तहत स्वास्थ्य टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों में 269 लोगों की जांच की, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलिकोट में 69 लोगों का परीक्षण किया गया। इस दौरान 45 ब्लड सैंपल लिए गए। गंभीर लक्षण वाले तीन मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया गया। जरूरत के अनुसार मरीजों को दवाएं, जिंक, ओआरएस और क्लोरीन की गोलियां भी उपलब्ध कराई गईं।

●77 रैपिड टेस्ट में नहीं मिला संक्रमण..

हरिनगर और सात नंबर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 77 रैपिड टेस्ट किए। विभाग के अनुसार सभी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई हैं। संभावित और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी आगे भी जारी रहेगी।

●आड़ूखान और मनोरा में लोगों को किया जागरूक..

डायरिया और पीलिया से बचाव को लेकर आड़ूखान व मनोरा के आंगनबाड़ी केंद्रों में जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल, व्यक्तिगत स्वच्छता, ओआरएस के इस्तेमाल और जलजनित बीमारियों से बचाव के उपाय बताए गए। अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।

●विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी ओपीडी सेवा..

ज्योलिकोट पीएचसी में प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए चंदन सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल हल्द्वानी के वरिष्ठ एमडी फिजिशियन डॉ. हिमांशु कुमार, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सिद्धांत मेहता और सेंट्रल हॉस्पिटल हल्द्वानी के डॉ. सचिन चक्रवर्ती ने ओपीडी सेवाएं दीं। 14 सितंबर को नीलकंठ हॉस्पिटल हल्द्वानी की वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. मेघा रखौलिया, डॉ. शाहिल समेत विशेषज्ञों की टीम पीएचसी ज्योलिकोट में मरीजों को परामर्श देगी।
विभाग ने लोगों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ उठाने की अपील की है। मरीजों की काउंसलिंग के लिए सीएचओ के माध्यम से टेली-मानस और ई-संजीवनी सेवाओं का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रभावित क्षेत्रों में ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य, सामुदायिक नेताओं और स्थानीय सक्रिय लोगों को जोड़कर निगरानी तंत्र बनाया गया है। इसके माध्यम से मरीजों के उपचार, सरकारी व निजी अस्पतालों की जानकारी और आयुष्मान योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जा रही है। स्वस्थ हो चुके मरीजों को भी जनजागरूकता अभियान में ‘स्वास्थ्य योद्धा’ के रूप में जोड़ा जा रहा है।