नागपंचमी में उत्तराखंड में पाए जाने वाले नागों की नही होती है पूजा…आचार्य डॉ. दिनेश त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य.

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आमजन को नागपंचमी के बारे में होती है केवल इतनी जानकारी…

नाग पचंमी का त्योहार सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।सनातन धर्म में केवल सर्प को ही पूजनीय नही माना गया है।बल्कि हमारे सभी देवी-देवताओं के वाहन विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी रहे। क्योंकि भगवान श्री नारायण का वाहन भी सर्पराज शेषनाग ही था।इसीलिए सनातन धर्म में सभी पशु-पक्षियों व रेप्टाइल प्रजाति को भी धर्म से शायद इसलिए जोड़ दिया कि उनके प्रति नम्र व श्रद्धा भाव आमजन के भीतर रहें।और उनकी नृशंस हत्या को भी रोका जा सके।

नाग देवताओं की पूजा के लिए श्रावण मास की पंचमी तिथि काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।और इस दिन सर्प की विशेष पूजा अर्चना होती है।जिसे आमजन नाग पंचमी के नाम से जानते हैं। इस दिन महिलाएं नाग देवता की पूजा करतीं हैं।और सर्प प्रजाति को दूध का अर्पण भी किया जाता है।आपको बता दें कि इस बार 2 अगस्त को नागपंचमी का त्योहार है।

अब हम आपको बताएंगे कि नागपंचमी की पूजा कौन कर सकता है।किस नाग विशेष की होती है पूजा,और क्या है इस पूजा का महत्त्व…

विधानानुसार केवल अनेक मुहँ धारी वासुकी नाग की करें पूजा…

डी.लिट् आचार्य डॉ. दिनेश त्रिपाठी जो कि प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य भी है।उन्होंने बताया कि श्रावण मास के कृष्णपक्ष की पंचमी तिथि काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।लेकिन इस दिन हमारे क्षेत्रों में पाए जाने वाली सर्प प्रजाति की पूजा नही होती बल्कि अनेक फन वाले वासुकी नाग की पूजा होती है। जो कि सतलुज नदी के किनारे या हिमांचल प्रदेश में पाए जाते हैं।बहुत समय पूर्व यह नागपंचमी पूजा केवल उन्हीं क्षेत्रों में पूजी जाती थी।जो कि कालान्तर में सम्पूर्ण उत्तर भारत में शुरू हो गई।

डी.लिट् आचार्य डॉ. दिनेश त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य ने बताया कि नागपंचमी में ऐसे करें पूजा…

आचार्य डॉ. दिनेश त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य ने बताया कि जिन क्षेत्रों में अनेक मुहँ वाले वासुकी नाग नही पाए जाते हैं।उन्हें कम से कम तीन मुहँ वाले ताँबे के वासुकी नाग की प्रतिमा व एक नागिन की प्रतिमा को प्राण प्रतिष्ठित कर गंगा जल,दुग्ध स्नान किया जाना चाहिए।तथा छोटे मिट्टी के दिये समान बर्तनों में चना या धान का लावा रखा जाता है।तथा नागपंचमी के बाद उक्त सामग्री को तांबे के नाग,नागिन सहित किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर देना चाहिए।

किन जातकों को अवश्य करनी होती है नागपंचमी में पूजा…

ऐसा माना जाता है कि प्राचीन समय में वासुकी नाग ने भगवान नारायण की घोर तपस्या की थी।जिससे प्रसन्न होकर प्रभु नारायण ने वासुकी को वरदान दिया कि श्रावण मास के कृष्णपक्ष की पंचमी में जो मानव तुम्हारी पूजा करेगा उसका काल सर्प दोष टल जाएगा। इसलिए जिनकी कुंडली मे काल सर्प दोष या काल पाश होता है।उन्हें नागपंचमी की पूजा अवश्य करनी चाहिए साथ ही जिनकी कुंडली में राहु, धन भाव में व केतु अष्टम भाव में प्रथम स्थिति में हो,या इसके उलट केतु,धन भाव में व राहु अष्टम भाव में हो यह द्वितीय स्थिति हुई।तृतीय स्थिति में यदि राहु और शनि के मध्य में राहु धन भाव में व भाग्य में शनि हो तो यह काल पाश योग होता है। या जिस व्यक्ति का कोई भी कार्य सफल नही होता हो तो वो भी इस नागपंचमी की पूजा को करके लाभ उठा सकता है।इसी दोष के कारण व्यक्ति पैतृक संपत्ति को भी खो बैठता है।इसके दोष निवारण के लिए भी वासुकी नागपूजा अनिवार्य बतायी गई है।

वासुकी नाग क्षत्रिय वंश के होते हैं कुलदेवता…

वासुकी नाग क्षत्रियों के कुलदेवता भी होते हैं।जिनके पूर्वज महाराज ययाति थे।इसीलिए केवल हिमांचल व जम्मू-कश्मीर में नाग देवता के मंदिर होते हैं।और यहाँ के निवासियों की इनमें गहरी आस्था भी होती है।नागपंचमी के दिन इन मंदिरों में भारी भीड़ देखी जाती है।

नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त

नाग पञ्चमी मंगलवार, अगस्त 2, 2022 को
नाग पञ्चमी पूजा मूहूर्त -सुबह 06 बजकर 05 से 08 बजकर 41 मिनट तक।अवधि – 02 घण्टे 36 मिनट्स
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ – अगस्त 02, 2022 को सुबह 05 बजकर 13 मिनट से शुरू
पञ्चमी तिथि समाप्त – अगस्त 03, 2022 को सुबह 05 बजकर 41 मिनट पर खत्म।