जमरानी बाँध परियोजना..1975 से अब तक नही चढ़ सकी परवान..@ लंबा इंतजार..एक बार फिर जगी उम्मीदें

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नैनीताल से संजय नागपाल की रिपोर्ट….

जमरानी बाँध परियोजना..1975 से अब तक नही चढ़ सकी परवान..@ लंबा इंतजार..एक बार फिर जगी उम्मीदें

केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने जमरानी बांध निर्माण को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की।उन्होंने 2584 करोड़ की लागत से बनने वाली जमरानी बांध परियोजना को एडीबी के पूर्व विश्लेषण के आधार पर ही निर्माण प्रारंभ करने की मांग की है। केंद्रीय वित्त मंत्री भट्ट ने निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार मुलाकात करते हुए कहा कि बार-बार एडीबी के पुनः विश्लेषण से केवल विलंब हो रहा है जबकि कई दशकों से की जा रही मांग के बाद केंद्रीय जल आयोग ने जमरानी बांध योजना स्वीकृत की है। लंबे समय से उठ रही मांग और तराई भाबर में पेयजल का भारी संकट होने के कारण लोगों का पलायन प्रारंभ हो रहा था, इस योजना के बनने से 14 मेगावाट बिजली का उत्पादन बढ़ेगा और उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश में डेढ़ लाख हेक्टेयर में सिंचाई होगी।

अजय भट्ट ने केंद्रीय वित्त मंत्री को अवगत कराते हुए कहा है कि परियोजना की डीपीआर केंद्रीय जल आयोग भारत सरकार सहित विभिन्न विभागों द्वारा स्वीकृत है।और उनके संज्ञान में आया है की केंद्रीय जल आयोग भारत सरकार द्वारा स्वीकृत डीपीआर के तकनीकी पहलुओं का एडीबी द्वारा पुनः विश्लेषण किया जा रहा है। जिसमें एडीबी द्वारा पूर्व में दी गई समय सारणी प्रभावित होने की संभावना है ऐसी स्थिति में बांध हेतु ऋण स्वीकृति सहित कार्य प्रारंभ होने में विलंब होना प्रतीत हो रहा है।

डूब क्षेत्रों में आने वाले लोगों का होगा पुनर्वास

अजय भट्ट ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों के पुनर्वास और भूमि आवंटित किए जाने पर सहमति बनने के बाद मास्टर प्लान तैयार किया जाने की कार्यवाही गतिमान है। अब सिर्फ प्राग फार्म की उक्त भूमि राजस्व विभाग द्वारा सिंचाई विभाग को हस्तांतरित की जानी है, ताकि डूब क्षेत्र के लोगों को यहां पर बसाया जा सके।

मिला आश्वासन
केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद रक्षा व पर्यटन राज्य मंत्री ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीबी के अध्यक्ष से तुरंत बात करने का आश्वासन दिया है।

आपको बता दें कि जमरानी बांध परियोजना का प्रस्ताव वर्ष 1975 में तैयार किया गया था। केंद्रीय मंत्रालयों और वित्तीय मंजूरी मिलने में करीब 44 साल का लम्बा समय लगा।इस परियोजना को अक्तूबर 2019 में केंद्रीय मंजूरी मिली।तथा अगस्त 2020 में सर्वे आदि को लेकर कवायद शुरू हुई। अफसरों के मुताबिक परियोजना का काम शुरू होने से 5 साल के भीतर काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन परियोजना स्वीकृति के समय में विलंब होने के चलते इसकी लागत लगातार बढ़ती रही।केंद्रीय रक्षा व पर्यटन मंत्री अजय भट्ट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया कि उक्त परियोजना को पिछली स्वीकृत धनराशि से ही जल्द शुरू कर दिया जाए ताकि उत्तराखंड के तराई व उत्तरप्रदेश की डेढ़ लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर सिंचाई व पेयजल की सुविधा भी मिल सकेगी।साथ ही बिजली उत्पादन भी बढ़ जाएगा..
कुलमिलाकर 47 सालों के बाद भी जमरानी बाँध परियोजना शुरू नही की जा सकी है।वर्तमान में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आश्वासन क्या रंग लाता है यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा..क्योंकि वर्ष 1975 में 61 करोड़ की लागत (डी.पी.आर) से शुरू होकर 2018 में 2754.1करोड़,वर्तमान में न जाने कितनी लागत में बनेगा जमरानी बाँध..?