सर्वोच्च अदालत की राज्य सरकार को कड़ी फटकार..मणिपुर वीडियो मामला…

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मणिपुर वायरल वीडियो मामले में केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ पीड़िताएं पहुंचीं हैं सर्वोच्च अदालत…

मणिपुर के जातीय विवाद की शुरुआत या जड़ कहीँ भी हो पर ये मानवीय मूल्यों के ख़िलाफ़ ही मानी जायेगी।यहाँ लगातार हो रही हिंसा के बीच कुछ ऐसे वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनसे आमजनमानस की रूह ही काँप जा रही है।विगत दिनों इस जातीय हिंसा के बीच वायरल हुई दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके घुमाने के वीडियो के बाद पूरे देश में गुस्सा है।हालात यह है यौन हिंसा की शिकार इन दोनों महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी है।जिस पर आज ही सुनवाई हुई है।दरअसल ये महिलाएं मामले की सी.बी.आई जांच और उसे असम स्थानांतरित करने के पूरी तरह से खिलाफ हैं।सुप्रीम कोर्ट में कल दोपहर भी मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

उक्त वायरल वीडियो पर सी.जे.आई ने सरकार की लगाई फटकार..और पूछा कि मामले में जीरो एफ.आई.आर दर्ज करने में 14 दिनों का विलंब क्यों…?

आपको बता दें कि मणिपुर के वायरल वीडियो के मामले में सुनवाई करते हुए आज सी.जे.आई डी.वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे.बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि मणिपुर का यह जो वीडियो सामने आया है यह देश की एकमात्र घटना नहीं है। जहां महिलाओं के साथ मारपीट या उत्पीड़न किया गया हो। हमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा के व्यापक मुद्दे को देखने के लिए एक तंत्र भी बनाना होगा।सी.जे.आई डी.वाई चंद्रचूड़ ने सरकार से पूछा कि 3 मई के बाद से ऐसी कितनी एफआईआर दर्ज की गई हैं।अब वह दोनों पक्षों को संक्षेप में सुनेगा और फिर कार्रवाई के सही तरीके पर फैसला करेगा।उक्त वीडियो आने के बाद एफ.आई.आर दर्ज करने में 14 दिन क्यों लगे..?
यहाँ यह बताना भी आवश्यक है कि 20 जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने मणिपुर घटना का स्वतः: संज्ञान लेते हुए केंद्र व राज्‍य सरकार को निर्देश जारी किए थे। इसी के साथ अदालत ने यह भी कहा था कि अगर सरकार कुछ नहीं करती तो उसे दखल देना पड़ेगा।

अधिवक्ताओं ने देश के अन्य राज्यों में भी महिलाओं पर अत्याचार की बात कर मणिपुर के उक्त मामले को कमत्तर आंकने का किया प्रयास..पर सी.जे.आई ने सुनाई खरी खरी…

भाजपा की दिग्गज नेत्री रही सुषमा स्वराज की एडवोकेट बेटी बाँसुरी स्वराज ने मणिपुर वायरल वीडियो की तुलना मई 2023 में बंगाल पंचायत चुनावों के समय निर्वस्त्र कर घुमाई गई युवतियों से कर सभी महिलाओं को न्याय के दायरे में लाने की गुजारिश कर दी।जिस पर सी.जे.आई ने कहा कि इस तथ्य में कोई दो राय नहीं है कि पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं। इसका एकमात्र उत्तर यह है कि आप मणिपुर जैसे देश के एक हिस्से में जो हो रहा है उसे माफ नहीं कर सकते। इस आधार पर कि इसी तरह के अपराध अन्य हिस्सों में भी हो रहे हैं। सवाल यह है कि हम मणिपुर से कैसे निपटें..? उन्हीने कहा कि क्या आप एक पल के लिए कह रहे हैं कि या तो भारत की सभी बेटियों के लिए कुछ करें या किसी के लिए कुछ भी न करें..?