खुद रह रहे थे पक्के मकान में…….और इस अधिकारी ने तोड़ दिए मकान भेज दिया झोपड़ी में…अब क्या फसेंगी डीएम की गर्दन..

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नैनीताल – 2018 में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कुष्ठ रोगियों के आश्रम के रोगियों के मकानों को तोड़ने पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। चीफ जस्टिस विपिन सांघी की कोर्ट ने 2 हफ्ते का टाइम दिया है और पूछा है कि कुष्ठ रोगियों के लिए कितने कैम्प लगे हैं और उनके पुनर्वास के लिए कितने आश्रम बने हैं। आपको बतादें की एक संस्था ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा है की 17 नवम्बर 2018 को हरिद्वार में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान गंगा माता कुष्ठ रोगियों के पक्के मकानों को प्रशासन ने तोड़ दिया ताकि राष्ट्रपति उनको ना देख सकें उनके लिए ये आवास इंग्लैंड की संस्था ने बनाये थे। याचिका में कहा गया है कि मकान तोड़ने के बाद कुष्ठ रोगी गर्मी बरसात सभी मौसम में झोपड़ी में रह रहे हैं। हाई कोर्ट के वकील दुष्यंत मैनाली ने कहा कि राष्ट्रपति को साफ सुथरा दिखाने के लिए पक्के आवासों को तोड़ दिया गया अब वो परेशान हैं।

पहले भी कोर्ट ने क्या था ये…

दरअसल राष्ट्रपति के दौरे के समय चंडीघाट पर तत्कालीन ज़िलाधिकारी के कुष्ठ रोगियों को उनके आवास से बेघर करने पर हाईकोर्ट ने सरकार और हरिद्वार विकास प्राधिकरण से जवाब मांगा था. चीफ़ जस्टिस की बेंच ने हरिद्वार जिला विकास प्राधिकरण से पूछा है कि क्या चंडीघाट पर 7 आश्रमों के प्रभावशाली लोगों से जुड़े होने के चलते कोई कार्रवाई नहीं की गई थी? और सिर्फ गंगा माता कुष्ठ आश्रम पर ही कार्रवाई क्यों की गई थी? हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को उस वक्त दो हफ्ते में शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने का आदेश करते हए यह भी पूछा है कि जिन 7 आश्रमों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है वे मेला क्षेत्र से 200 मीटर दायरे में आते हैं या नहीं? हाईकोर्ट ने अपने जवाब में यह भी साफ़ करने को कहा है कि ये सातों आश्रम किसके हैं, इनका मालिक कौन है?

प्रभावितों को कितना मुआवज़ा दे सकती है सरकार?

इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि प्रभावित 13 परिवारों को सरकार कितना मुआवजा दे सकती है और उनको कहा विस्थापित किया जा सकता है? सरकार से इसकी डिटेल्ड रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा गया है.

बतादें कि 17 नवम्बर, 2017 को राष्ट्रपति के दौरे के लिए ज़िला प्रशासन ने कुष्ठ रोगियों के पक्के आवासों को तोड़ दिया था. इससे ये रोगी बेघर हो गए थे जिसके बाद हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लिया और मामले पर कोर्ट सख्त है…..

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