रामगढ़ के नाम बड़ी उपलब्धि….150 करोड़ होगा जल्द जारी..

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रामगढ़ से प्रवीण कपिल की रिपोर्ट

नैनीताल – नैनीताल रामगढ के नाम एक बड़ी उपलब्धि से जुड़ गया है। रविन्द्र नाथ टैगोर की कर्मस्थली में अब विश्व भारती विश्वविघालय की स्थापना होने जा रही है। उत्तराखण्ड के सीएम ने इसका आज भूमिपूजन कर दिया है। राष्ट्रगान के रचयेता गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की 161वीं जयंती के मौके पर ये कार्यक्रम आयोजित हुआ..रामगढ में रविन्द्र नाथ टैगोर की कर्मस्थाली में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सीएम ने कहा कि यहां बनने वाला परिसर गीतांजलि के नाम से जाना जाएगा और ये क्षेत्र शिक्षा के लिए अग्रणी काम करेगा। इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि आने वाला दशक उत्तराखण्ड का है यहां पर्यटन से लेकर शिक्षा स्वास्थ्य पर बेहतर काम होगा और लोग पहाड़ आयेंगे..मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उन्होंने कहा कि विश्व भारतीय केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का रामगढ़ में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के परिसर की स्थापना में अपनी रुचि व्यक्त की है वह उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है और इस सौगात से जहां विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय उत्तराखंड को भारत के प्रमुख शिक्षा केन्द्र के रूप में स्थापित होने का अवसर प्राप्त होगा । वहीं स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नये अवसर उपलब्ध होंगे, तथा यह राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटकों एवं शोधार्थियों के लिए भी नया गंतव्य बनेगा।

टैगोर टाँप में लिखी गीतांजलि के कुछ अंश तो तीन देशों का लिखा राष्टगान..

आपको बतादें कि गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को जोड़ासाँकू ठाकुरबाड़ी कोलकता में हुआ साहित्य के लिये नोबल पुरस्कार पाने वाले टैगौर 1903 से 1913 तक तीन बार रामगढ आए और यहीं उन्हौने अपना आशियाना भी बनाया जहां उन्हौने गीतांजलि के कुछ अंश की रचना की है. तो तीन देश भारत श्रीलंका और बंगलादेश का राष्टगान भी लिखा हांलाकि केन्द्र सरकार ने रामगढ में विश्वभारती विश्वविघायल की घोषणा की थी जिसके बाद 45 एकड़ भूमि भी इसके लिये उपलब्ध करा दी गई है। रामगढ टैगोर के इस कार्यक्रम के दौरान सीएम ने कहा कि विश्व भारती की स्थापना के लिए प्रथम चरण में 150 करोड़ रूपये की डी ० पी ० आर ० केन्द्र सरकार में स्वीकृति की प्रक्रिया में है, उत्तराखंड सरकार द्वारा 45 एकड़ भूमि मे विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर की स्थापना की औपचारिकता पूर्ण कर ली गई ।

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