सुपर टेक द्वारा प्राधिकरण से मिलीभगत कर बनाये गए ट्विन टावर्स का हुआ ध्वस्तीकरण..कोर्ट ने समझा मामला पर सरकार ने नही…

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कुछ ही सेकेंड में धराशाही हुआ नोएडा का अवैध ट्विन टावर..लेकिन इस अवैध निर्माण को वक़्त रहते क्यों नही रोका प्राधिकरण ने यह बड़ा सवाल उठ रहा..?


उत्तरप्रदेश के नोएडा में आज जिन दो इमारतों को ध्वस्त गया है। वह दिल्ली के कुतुब मीनार से भी ऊंची 100 मीटर की बिल्डिंग थी। इन इमारतों को गिराने के लिए कई किलोग्राम  विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया।
आपको बता दें कि नोएडा में सुपर टैक बिल्डर्स ने वर्ष 2000 के मध्य में “एमरल्ड कोर्ट” सोसायटी नाम से एक परियोजना की शुरुआत की थी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे के समीप स्थित बनायी जा रही इस परियोजना के तहत 3, 4 और 5 बीएचके फ्लैट्स बनाये जाने की यह योजना थी।
सुपर टेक बिल्डर्स ने समय-समय पर अपनी प्रस्तावित बिल्डिंग्स के फ्लोर व बिल्डिंग्स की संख्या भी बदल दी।जहाँ 14 इमारतें 9 मंजिला के प्रस्ताव विकास प्राधिकरण को दिए गए थे।उनमें वर्ष 2005,2006 के बाद निरंतर बदलाव किए गए।व वर्ष 2012 तक परिसर में 14 के बजाय 15 इमारतें बना दी गई।उसमें भी नौ मंज़िल के स्थान पर 11मंज़िलें फ्लोर बना दिये गए।

सुपर टेक ने छोड़े गए “ग्रीन एरिया” में ही प्राधिकरण से मिलीभगत कर बना दी ये इमारतें…

इन इमारतों के मध्य जो “ग्रीन एरिया” बच्चों के खेलने,पार्किंग के लिए छोड़ा गया था।उस पर भी सुपर टेक ने एक और योजना शुरू कर दी। जिसमें दो अन्य 40 मंजिला इमारतें बनायी जानी थी। ऐसे में कंपनी और एमरल्ड कोर्ट सोसायटी निवासियों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।

“एमरल्ड कोर्ट सोसायटी” में रहने वालें बाशिंदों ने ही लिया इस मामले का संज्ञान…

इस छोड़े गए ‘ग्रीन’ एरिया में 40 मंजिलें “सियेन” और “एपेक्स” ट्विन टावर्स बनाए जा रहे थे।एमरल्ड कोर्ट सोसायटी में रहने वालें बाशिंदों ने इसका संज्ञान लिया और नोएडा प्राधिकरण से उनके निर्माण के लिए दी गई मंजूरी को रद्द करने की माँग की।

योगी सरकार से पूर्व ही उच्च न्यायालय ने दिए थे ध्वस्तीकरण के आदेश..2021 में सुप्रीम कोर्ट ने उक्त आदेश को रखा बरकरार…

जिस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भी अपील कर दी गई जिस पर अदालत ने अप्रैल 2014 में टावरों को ध्वस्त करने का आदेश दे दिया हालांकि सुपरटेक उक्त फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चला गया। तथा देश की सर्वोच्च अदालत ने भी वर्ष 2021 में नोएडा स्थित ट्विन टावर्स के ध्वस्तीकरण का आदेश बरकरार रखा।पुनः विचार याचिका में भी सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला नहीं बदला।जिसका परिणाम आज ध्वस्त किये गए इन ट्विन टावर्स को पूरे देश ने देखा।

उक्त ट्विन टावर्स निर्माण पर उठ रहे हैं बड़े सवाल…

कुलमिलाकर इस मामले में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब “ग्रीन एरिया” में इन ट्विन टावर्स की योजना प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की गई।तब मसले में प्राधिकरण द्वारा टाल मटोल क्यों की गई। क्यों नही.. इस योजना को प्राधिकरण द्वारा अमान्य घोषित किया गया..? क्या प्राधिकरण अधिकारियों को सुपर टेक द्वारा मोटी रिश्वत देकर उनका मुहँ बंद कर दिया गया..? क्योंकि सुपर टेक ने कहा कि उक्त भवन नोएडा प्राधिकरण से मंजूर भवन योजना के अनुरूप ही बनाए थे।
हालांकि “ग्रीन एरिया” में बनाये गए इन ट्विन टावर्स पर उच्च न्यायालय व सर्वोच्च अदालत का फैसला तर्क संगत व एमरल्ड निवासियों के हक में बेहतर फैसला कहा जायेगा।इस ध्वस्तीकरण की कार्यवाही से सुपर टेक को तो सबक मिल गया पर उक्त अवैध निर्माण में संलिप्त प्राधिकरण अधिकारियों पर कोई दोष साबित न होने से यह न्याय भी एकतरफा ही प्रतीत होता है।उत्तरप्रदेश सरकार को चाहिए कि मामले में संलिप्त अधिकारियों व मध्यस्थता करने वालों की जाँच भी सी.बी.आई से सुनिश्चित करवाई जाए जिससे उन अधिकारियों को भी सबक मिले जो आमजन के मेहनत से कमाए धन व संपत्ति पर सेंध-मारी कर अपनी जेबें भरते रहते हैं।