हाई कोर्ट शिफ्टिंग….कैबिनेट के फैसला वकीलों की दलील….कहीं खुशी तो कहीं गम कारोबार जमा चुके वकीलों का क्या

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उत्तराखण्ड – उत्तराखण्ड की धामी सरकार ने पहाड़ से एक और संस्थान को तराई में शिफ्ट करने का निर्णय ले लिया है। नैनीताल हाईकोर्ट को कैबिनेट ने तराई में शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट ने हाईकोर्ट को सैद्धांतिक स्वीकृत देते हुए हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने का फैसला ले लिया है। इसके साथ ही कैबिनेट ने उत्तराखंड में धर्मांतरण कानून में किए गए सख्त संशोधन उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण अब होगा संज्ञेय अपराध के साथ नए कानून में 10 साल की सजा का प्रावधान समेत अन्य पर निर्णय लिया है। हालांकि इस फैसले के बाद हल्द्वानी के वकीलों में खुशी है और वकीलों ने मिठाई बांटी है खुशी का इजहार किया है वकीलों ने कहा कि न्याय आसान होगा। हालांकि उन वकीलों को टेंसन होने लगी है जिन लोगों ने बड़े मकान और ऑफिस नैनीताल में बना लिए हैं। वहीं कैबिनेट के इस निर्णय के बाद जमीन बेचने वाले भी सक्रिय हो गए हैं।

हाईकोर्ट शिफ्ट पर क्या बोले वकील ….


हाईकोर्ट के अधिवक्ता भुवनेश जोशी ने कहा कि जो निर्णय सीएम धामी की कैबिनेट ने लिया है वो पहाड़ विरोधी है और इससे मुख्यमंत्री पहाड़ी होने का ड्रामा करता था वो भी दिख गया है।
पूर्व सांसद और महेंद्र पाल ने कहा कि राजधानी को स्थायी करना होता तो उनकी तारिफ की जा सकती थी और हाईकोर्ट जो स्थायी है उसको अस्थायी करना पहाड़ से पलायन की पहली शुरुआत होगी ये इस सरकार का दुर्भाग्य कहलायेगा।
वहीं सीनियर वकील आर एस संभल ने कहा कि आज नैनीताल में हाईकोर्ट आने के लिये खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वादकारी और वकीलों को आने जाने की दिक्कतें है लेकिन अगर हाईकोर्ट को शिफ्ट हल्द्वानी में किया जा रहा है तो 50 सालों की प्लानिंग होनी चाहिये ताकि लोगों को दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। हल्द्वानी में रेलवे के साथ अस्पतालों और एयरपोर्ट की सुविधाओं को भी बढाया जाना चाहिये।
हाईकोर्ट के युवा वकील शैलेन्द्र नौडियाल ने कहा कि जब राज्य बना था तो पहाड की परिकल्पना की गई थी और आज ये निर्णय 1992 के शहीदों के साथ अन्याय है सरकार ने कहा कि ये निंदा योग्य निर्णय है और इसका स्वागत नहीं किया जा सकता है अगर आन्दोलन करना पड़ेगा तो वो भी करने को तैयार हैं।
हाईकोर्ट में सालों से काम कर रहे वकील निरंजन भट्ट ने कहा कि राज्य की अवधारणा के खिलाफ सरकार ने निर्णय लिया है और ऐसे संस्थानों को शिफ्ट किया जा रहा है वो गलत है। निरंजन भट्ट ने कहा कि इतना खर्चा यहां करने के बाद अब निर्णय लिया जा रहा है कि हाईकोर्ट शिफ्ट किया जा रहा है जनता के पैंसे का दुर्पयोग है।
युवा वकील रक्षित जोशी ने कहा कि यहां की लोकल विधायक ने कहा कि यहां से विस्थापन हाईकोर्ट ना हो लेकिन स्टेक होल्ड़रों से भी इस पर सुझाव लिये हैं कि नहीं ये भी सवाल बना हुआ है।