नैनीताल। हाईकोर्ट के निर्देश पर बुधवार को उत्तराखंड के चिकित्सा-स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडे ने बीडी पांडे जिला अस्पताल का निरीक्षण किया।

इस दौरान उन्होंने अस्पताल की ओपीडी, पैथोलॉजी, भवन, विभिन्न काउंटरों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया।

स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडे और अपर सचिव डॉ. सौरभ गहरवार ने अस्पताल का निरीक्षण किया। डॉ. गहरवार ने महिला विंग का भी निरीक्षण किया।
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि हाईकोर्ट ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, स्वास्थ्य ढांचे और मानव संसाधन को लेकर जानकारी मांगी है। न्यायालय के निर्देश पर जल्द ही स्टेटस रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी।
●छोटे उपकरणों की कमी तत्काल दूर करने के निर्देश…
निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य सचिव ने सीएमएस को अस्पताल में छोटे उपकरणों की कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि उपयोगकर्ता शुल्क से प्राप्त होने वाली धनराशि से आवश्यक छोटे उपकरण अगले तीन-चार दिनों में खरीदे जाएंगे। वहीं बड़े कार्यों के लिए डीपीआर तैयार कर शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दो दिन के भीतर संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि अस्पताल की गरिमा और नैनीताल जिले के साथ आसपास के क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए यहां उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
●प्रदेश में करीब 400 डॉक्टरों की कमी…
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में डॉक्टरों के कुल 2909 पद स्वीकृत हैं, जबकि करीब 2550 डॉक्टर कार्यरत हैं। वर्तमान में लगभग 400 से 450 डॉक्टरों की कमी है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले यह कमी करीब 650 डॉक्टरों की थी। मेडिकल बोर्ड के माध्यम से 252 डॉक्टर मिले हैं, जिनमें मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं। इनमें करीब 200 डॉक्टरों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया लगातार चल रही है।

मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी को दूर करने के लिए भी चयन प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा आउटसोर्स के माध्यम से भी चिकित्सकों की सेवाएं ली जा रही हैं। 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले चिकित्सकों को भी पांच वर्ष तक क्लीनिकल सेवाएं देने की अनुमति दी जा रही है।
स्वास्थ्य सचिव के अनुसार मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर चल रही रणनीति के तहत अगले तीन से चार माह में प्रदेश में डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर करने का प्रयास है।
●दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी पर भी फोकस..
दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी के सवाल पर स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि हाल में हुए स्थानांतरण में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रदेश में पीएचसी, सीएचसी, सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल और जिला अस्पतालों की पूरी व्यवस्था के अनुसार चिकित्सकों की तैनाती की जा रही है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान होना चाहिए। संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह अपने स्तर पर कमियों को दूर करे और आवश्यकता होने पर उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाए। उन्होंने अधिकारियों को मौके की व्यवस्थाओं के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाए जाने की बात भी कही।
●भवाली सैनिटोरियम की योजना पर जल्द दिखेगी प्रगति..
भवाली सैनिटोरियम को मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने की योजना और ऐतिहासिक आरएमएस अस्पताल की बदहाल स्थिति के संबंध में पूछे गए सवाल पर स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि भवाली अस्पताल के संबंध में हाईकोर्ट को स्थिति से पहले ही अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द इसकी प्रगति देखने को मिलेगी।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए शासन, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर समन्वय के साथ काम किया जाएगा।







