अंतिम युद्ध’ ने दिखाई युद्ध की विभीषिका, मानवीय संवेदनाओं के संकट को किया जीवंत… रिपोर्ट- (सुनील भारती) “स्टार खबर ” नैनीताल

9

नैनीताल। सिने एवं रंगमंच अभिनेता-निर्देशक स्व. निर्मल पांडे जन्मोत्सव-2026 के तहत मंगलवार को जगदीश साह प्रेक्षागृह, सीआरएसटी मल्लीताल में वरिष्ठ रंगकर्मी एचएस राणा द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘अंतिम युद्ध’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। युगमंच नैनीताल के गौरवशाली 50 वर्ष और प्रयोगांक नैनीताल की प्रस्तुति ने दर्शकों को युद्ध की विभीषिका, मानवीय संवेदनाओं के संकट और सभ्यता के भविष्य पर गंभीरता से सोचने को विवश किया।नाटक की कथा तीसरे विश्वयुद्ध के बाद की विनाशकारी पृष्ठभूमि पर आधारित है। डिस्टोपियन और एब्सर्ड शैली में रचे गए इस नाटक में युद्ध से बचने के लिए एक बंकर में छिपे चार लोगों के जीवन के माध्यम से भूख, भय, प्रेम, विवेक, नैतिकता और जीवन के प्रति मनुष्य के मोह को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।निर्देशक एवं लेखक एचएस राणा ने बताया कि ‘अंतिम युद्ध’ केवल देशों के बीच होने वाले युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि मनुष्य के भीतर की इंसानियत और पशुता के बीच चलने वाले अंतिम संघर्ष को भी सामने लाता है। युद्ध की विभीषिका के बीच किस तरह मानवीय मूल्य, नैतिकता और सभ्यता धीरे-धीरे क्षरण की ओर बढ़ती है, नाटक में इसे बेहद संवेदनशीलता के साथ उकेरा गया।मंच पर मदन मेहरा ने पुरुष-1, सैनिक एवं रोबोट, दीपक साहदेव ने पुरुष-2, राजेश आर्या ने बूढ़े आदमी, योगिता तिवारी ने स्त्री तथा उमेश कांडपाल ने सैनिक की आत्मा की भूमिका निभाई। कलाकारों ने अपने पात्रों की मनःस्थितियों, तनाव और संवेदनाओं को सशक्त अभिनय के माध्यम से जीवंत कर दिया।नाटक के लेखक एवं निर्देशक एचएस राणा वर्ष 1974 से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने ‘कफन’, ‘एक कफन और’, ‘चौराहे का मसीहा’, ‘और सुबह होने लगी’, ‘भूत बंगला’, ‘चोर गांव’, ‘गधा पच्चीसी’ और ‘अंतिम युद्ध’ सहित अनेक नाट्य कृतियों का लेखन एवं निर्देशन किया है।मदन मेहरा ने सह-निर्देशन के साथ मंच पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच संयोजन में मुकेश धस्माना, मंजूर हुसैन, वीरेंद्र साह, विवेक खोलिया, नीरज डालाकोटी सहित अन्य रंगकर्मियों ने सहयोग किया। प्रकाश संयोजन अनिल कुमार, मंच सामग्री उमेश कांडपाल तथा मंच व्यवस्था एचएस राणा एवं मदन मेहरा ने संभाली। मंच संचालन उमेश कांडपाल ने किया।

प्रयोगांक नैनीताल वर्ष 2001 से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय है। वर्ष 2006 में संस्था का सोसाइटी पंजीकरण ‘प्रयोगांक सोसायटी फॉर सोशल एंड एनवायरनमेंटल डेवलपमेंट, नैनीताल’ के नाम से हुआ। संस्था अब तक अनेक पूर्णकालिक नाटकों का मंचन करने के साथ विभिन्न प्रदेशों में 10 हजार से अधिक नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुतियां कर चुकी है।

कार्यक्रम के अंत में नन्हे कलाकार भव्य मेहरा ने कविता पाठ किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस अवसर पर प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’, प्रो. धनेश पांडे, डॉ. नारायण सिंह जंतवाल, जहूर आलम, मिथिलेश पांडे, आलोक साह, गीता साह, राजीव लोचन साह, जितेंद्र बिष्ट, मंजूर हुसैन, अनिल घिल्डियाल, जैसी राम आर्य, डॉ. अनिल कार्की, चारु तिवारी, डीके शर्मा, हसन रजा, विक्रम सुयाल, हर्षवर्धन वर्मा, आकाश नेगी, नीरज डालाकोटी, भास्कर बिष्ट, नवीन बेगाना, पवन कुमार, मनोज कुमार, अनुराग बिसारिया, अनवर रजा, नासिर अली, रोहित वर्मा, कौशल साह, अजय पवार, खुर्शीद, दिलावर सिराज सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी मौजूद रहे।नाटक की प्रस्तुति और लेखन की सराहना करते हुए दर्शकों ने कहा कि ‘अंतिम युद्ध’ ने युद्ध के वास्तविक अर्थ के साथ-साथ मानवीय अस्तित्व, नैतिकता और सभ्यता के भविष्य को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।