ज्योलिकोट दूषित पेयजल प्रकरण में छह अधिकारी निलंबित… जल संस्थान और पेयजल निगम के अधिकारियों पर गिरी गाज.. अधिशासी अभियंता को भविष्य में कठोर कार्रवाई की चेतावनी.. रिपोर्ट- (ब्यूरो) “स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल। ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल से जलजनित बीमारियां फैलने के मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और दायित्व निर्वहन में लापरवाही सामने आने के बाद उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अनीश एम. पिल्लई को भविष्य में कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।निलंबित अधिकारियों में उत्तराखंड जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, नैनीताल के सहायक अभियंता मोहन सिंह रावत, अपर सहायक अभियंता रविंद्र, पेयजल निगम निर्माण शाखा भीमताल के प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह, प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्या और कनिष्ठ अभियंता दीपांशु शर्मा शामिल हैं। शासन के आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में संबंधित अधिकारियों को उनके विभागीय उच्चाधिकारियों के कार्यालयों से संबद्ध किया गया है।
ज्योलिकोट व आसपास के गांवों में पिछले कई सप्ताह से दूषित पेयजल को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। इसके बाद क्षेत्र में डायरिया, पीलिया और अन्य जलजनित बीमारियों के मामले बढ़े। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार पड़ने और मौतों के बाद मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और पानी के नमूनों की जांच कराने के निर्देश दिए थे।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मामले की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी अरविंद पांडे की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद अधिकारियों पर यह कार्रवाई की गई। इसी बीच हाईकोर्ट के समक्ष पेश जांच रिपोर्टों में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 10 नमूनों की जांच में सभी नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि स्वास्थ्य विभाग के पांच नमूनों में चार के असफल होने की जानकारी सामने आई थी।
शासन की कार्रवाई के बाद जल संस्थान लालकुआं के अधिशासी अभियंता नंद किशोर को वर्तमान दायित्व के साथ हल्द्वानी के अधीक्षण अभियंता का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। इससे विभागीय कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है।
हाईकोर्ट में भी होगी कार्रवाई की समीक्षा
ज्योलिकोट प्रकरण में हाईकोर्ट पहले ही मुख्य सचिव को मामले की निगरानी करने और जवाब दाखिल करने के निर्देश दे चुका है। अदालत ने जांच समिति में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत संबंधित विभागों को शामिल करने तथा प्रभावित परिवारों की स्थिति पर अलग रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए थे। ऐसे में शासन की ताजा कार्रवाई आगामी सुनवाई में भी महत्वपूर्ण रहेगी।