नैनीताल। सरोवर नगरी के मल्लीताल स्थित डीएसए मैदान में मंगलवार को विजयादशमी का पर्व धार्मिक उल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया।
श्रीराम सेवक सभा की ओर से आयोजित दशहरा महोत्सव में भगवान श्रीराम और रावण के बीच प्रतीकात्मक युद्ध के बाद रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। रावण दहन के साथ ही मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान भव्य आतिशबाजी ने आयोजन को आकर्षक बना दिया। राम-रावण युद्ध और पुतला दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी डीएसए मैदान पहुंचे।
मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे फ्लैट्स मैदान में बने मुख्य मंच पर भजन संध्या का शुभारंभ हुआ। भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान किया गया। शाम करीब 7:30 बजे श्रीराम सेवक सभा प्रांगण से भगवान श्रीराम की सेना बाजार होते हुए फ्लैट्स मैदान पहुंची। इसके बाद सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। अतिथियों ने भगवान श्रीराम की आरती उतारी, जिसके बाद राम-रावण युद्ध का मंचन किया गया।
युद्ध के दौरान जैसे ही भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया, पूरा मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इसके बाद रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। पुतलों के दहन के साथ हुई आतिशबाजी को देखने के लिए मैदान में लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। आयोजन में करीब 20 हजार से अधिक लोगों के मौजूद रहने का दावा आयोजकों की ओर से किया गया।
●बुराई पर अच्छाई की विजय का दिया संदेश..
दशहरा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। मान्यता है कि विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था। इसी परंपरा के तहत हर वर्ष रावण दहन कर बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया जाता है। नैनीताल में आयोजित महोत्सव ने शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत किया।इस दौरान
कार्यक्रम में विधायक सरिता आर्या, नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल, मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, पुलिस अधिकारी डॉ. मंजूनाथ टीसी, दिव्यांशु मीणा, डीएसए महासचिव मनोज जोशी, तहसीलदार अक्षय भट्ट, श्रीराम सेवक सभा अध्यक्ष मनोज शाह, महासचिव जगदीश बावड़ी, पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी मंटू सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन हेमंत बिष्ट और डॉ. ललित तिवारी ने किया।







