नैनीताल। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता महेंद्र पाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मंत्री रेखा आर्या की ओर से अपने पति के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर को दुर्भावना से प्रेरित बताया गया है। उन्होंने कहा कि दोनों का विवाह वर्ष 2004 में हुआ था और उनके बच्चे भी अब बड़े हो चुके हैं। ऐसे में इतने वर्षों बाद दर्ज कराई गई एफआईआर के पीछे गिरधारी लाल साहू को नुकसान पहुंचाने की मंशा है।
अधिवक्ता महेंद्र पाल के अनुसार, एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि गिरधारी लाल साहू ने धोखे से विवाह किया था और यह उनकी दूसरी शादी थी। बचाव पक्ष ने इन आरोपों और एफआईआर के पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखा।

अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल मामले में हाईकोर्ट की अंतिम टिप्पणी अथवा निर्णय सामने नहीं आया है।







