सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट सख्त, तीन सप्ताह में मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट.. होटल-रिजॉर्ट भी जांच के दायरे में… रिपोर्ट- (ब्यूरो) “स्टार खबर” नैनीताल..

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नैनीताल।उत्तराखंड में सरकारी, वन भूमि और नदी-नालों के किनारे की सार्वजनिक जमीनों पर हुए अवैध अतिक्रमण को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने प्रदेश के सभी 13 जिलों में अतिक्रमण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने और सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है। न्यायालय ने वन विभाग और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ अतिक्रमण चिह्नित कर उन्हें हटाने के निर्देश दिए हैं। इसमें जिलाधिकारियों, प्रभागीय वनाधिकारियों (डीएफओ) सहित संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। वन पंचायतों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों की मैपिंग कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में सरकारी और वन भूमि पर दोबारा अवैध कब्जे की स्थिति पैदा न हो।
अतिक्रमण के मामलों की निगरानी और कार्रवाई में तेजी लाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर समन्वय समितियां गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ये समितियां सरकारी भूमि के साथ खामोश और बेनामी जमीनों पर हुए कब्जों का सर्वे कर संबंधित रिपोर्ट तैयार करेंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में होटल, रेस्टोरेंट और बड़े रिजॉर्ट भी जांच के दायरे में हैं। नैनीताल, रामनगर, पौड़ी, देहरादून, ऊधम सिंह नगर और अल्मोड़ा समेत कई जिलों में ऐसे मामले सामने आने के बाद प्रशासन और वन विभाग ने कार्रवाई तेज की है।
हाईकोर्ट के इस रुख के बाद अब सभी जिलों के प्रशासन और वन विभाग पर निर्धारित समयसीमा में अतिक्रमण हटाने तथा उसकी प्रगति का ब्योरा न्यायालय के समक्ष रखने की जिम्मेदारी होगी।