पिरूल से रोजगार की राह: ग्रामीणों ने सीखे बायो-ब्रिकेट और सजावटी उत्पाद बनाने के हुनर…. रिपोर्ट- (सुनील भारती ) “स्टार खबर” नैनीताल…

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अल्मोड़ा। स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों को आजीविका का आधार बनाने की दिशा में ग्राम सभा ख्यूशलकोट में चीड़ आधारित आजीविका विकास पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। CHEA द्वारा यूएनडीपी (UNDP) एवं बीएमजीएफ (BMGF) वित्तपोषित परियोजना “जलवायु अनुकूलन हेतु डेटा विज्ञान का स्थानीयकरण” के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण में ग्रामीणों को पिरूल (चीड़ की पत्तियां) और लैंटाना से बायो-ब्रिकेट, घरेलू उपयोग की सामग्री तथा सजावटी वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण में जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के विशेषज्ञ डॉ. ललित गिर एवं डॉ. भोपाल सिंह बिष्ट ने प्रतिभागियों को पिरूल एवं लैंटाना कैमारा से बायो-ब्रिकेट तैयार करने की तकनीक विस्तार से समझाई। विशेषज्ञों ने मौके पर ही बायो-ब्रिकेट निर्माण की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि बायो-ब्रिकेट पारंपरिक ईंधनों का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है, जिसका उपयोग भोजन पकाने, पानी गर्म करने, कमरे गर्म रखने तथा छोटे उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पिरूल और लैंटाना से कम लागत में बायो-ब्रिकेट तैयार कर बाजार में बेचकर ग्रामीण अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। इससे जहां जंगलों में आग की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी, वहीं ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित होंगे।
इस दौरान यूएनडीपी से डॉ. प्रदीप मेहता तथा CHEA के कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रबंधक कुंदन बिष्ट ने ग्राम सभा इरहा एवं ख्यूशलकोट का भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने परियोजना के तहत संचालित गतिविधियों की जानकारी लेते हुए जलवायु अनुकूल कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। साथ ही ग्रामीणों को स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में ख्यूशलकोट की उप ग्राम प्रधान किरण आर्या, इरहा के ग्राम प्रधान आनंद सिंह मेहरा, भुवन सिंह, टीकम चन्द्र, डिजिटल सखी पूजा फर्त्याल एवं किरन आर्या सहित दोनों ग्राम सभाओं के अनेक ग्रामीणों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
कार्यक्रम के सफल संचालन में परियोजना सहायक मनीषा पंत एवं फील्ड सहायक प्रवीण कुमार का विशेष योगदान रहा। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों ने सीखी गई तकनीकों को अपनाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर विकसित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।